India UNSC Reforms | 'बिना वीटो और स्थायी विस्तार के अधूरा है बदलाव', भारत ने संयुक्त राष्ट्र में उठाई बुलंद आवाज

By रेनू तिवारी | Apr 15, 2026

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों को लेकर भारत ने एक बार फिर अपना कड़ा और स्पष्ट रुख दोहराया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने मंगलवार को अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) की बैठक में कहा कि यदि परिषद में स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार वीटो शक्ति के साथ नहीं किया गया, तो इस संस्था में मौजूदा असंतुलन और असमानता कभी खत्म नहीं होगी। भारतीय राजदूत ने चेतावनी दी कि सुरक्षा परिषद की वैधता और प्रतिनिधित्व पर उठने वाले सवालों का मूल कारण इसकी सदस्यता संरचना और वीटो अधिकार हैं।

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हरीश ने कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर व्यापक सहमति है। 80 साल से अधिक पहले बनी इसकी संरचना आज की बदलती वैश्विक-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है।’’ भारतीय राजदूत ने याद किया कि 1960 के दशक में परिषद में किये गए उस एकमात्र सुधार से वीटो का अधिकार रखने वाले देशों की ताकत और बढ़ गई जिसके तहत केवल अस्थायी श्रेणी में विस्तार किया गया था। तुलनात्मक रूप से देखें तो पहले वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों और अस्थायी सदस्यों का अनुपात 5:6 था, जिसे बाद में बदलकर 5:10 कर दिया गया। इससे वीटो का अधिकार रखने वाले देशों को अपेक्षाकृत अधिक फायदा मिला।

उन्होंने कहा, “कोई भी सुधार जिसके साथ वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार नहीं किया जाता, वह इस अनुपात को और बिगाड़ देगा और इस प्रकार मौजूदा असंतुलन और असमानताओं को कायम रखेगा। इसलिए, वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार सुरक्षा परिषद के वास्तविक सुधार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।” हरीश ने यह भी कहा कि वीटो अधिकार के साथ या उसके बिना, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार के ढांचे के तहत एक नई श्रेणी पर विचार करने से व्यापक विचारों वाली पहले से चल रही चर्चा “जटिल” हो जाएगी।

उन्होंने कहा, “सुधारों के मार्ग को सुव्यवस्थित और त्वरित करने के लिए सुधारों के दायरे को मौजूदा ढांचे तक सीमित रखना महत्वपूर्ण है।” भारत दशकों से सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग कर रहा है, जिसमें इसके स्थायी और अस्थायी दोनों वर्गों का विस्तार शामिल है। भारत का कहना है कि 1945 में स्थापित 15 देशों की यह परिषद 21वीं सदी के लिए उपयुक्त नहीं है और समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है।

भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि वह परिषद में स्थायी सीट का हकदार है। उन्होंने कहा, अतीत में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां निर्वाचित सदस्यों ने केवल अपने संकीर्ण स्वार्थों को पूरा करने के लिए अपने प्रभावी वीटो का प्रयोग करके बाधाएं उत्पन्न की हैं।

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