Hormonal Weight Gain: हार्मोन में बदलाव भी बन सकता है महिलाओं में वजन बढ़ने का कारण

By अनन्या मिश्रा | May 11, 2023

बिजी लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण अक्सर हमारा वजन बढ़ने लगता है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि इसके अलावा हार्मोनल डिसबैलेंस के कारण भी कई बार वजन बढ़ने की समस्या होती है। उच्च तनाव या कोर्टिसोल के बढ़े हुए लेवल के कारण भी वेट बढ़ने लगता है। इसे हॉर्मोनल वेट गेन भी कहा जाता है।

इसे भी पढ़ें: Nuchal Cord: क्या बच्चे के गले में अम्बिलिकल कॉर्ड लिपटने से होता है जान का खतरा, प्रेग्नेंसी में ऐसे सोएं महिलाएं

हार्मोन परिवर्तन और वेट गेन

महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान एस्ट्राडियोल नाम का एक विशिष्ट एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम हो जाता है। विशिष्ट एस्ट्रोजन हार्मोन बॉडी में मेटाबॉलिज्म और वजन को नियंत्रित करने में सहायक होता है। वहीं एस्ट्राडियोल का लेवल कम होने से भी वजन बढ़ने लगता है। इस दौरान महिलाओं के कूल्हों और जांघों के आसपास वजन बढ़ता है। 

न्युट्रीशनिस्ट और वेलनेस एक्सपर्ट ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि केवल आहार या व्यायाम से वेट लॉस नहीं किया जा सकता है। आंशिक रूप से वजन बढ़ने के लिए आपके हार्मोन को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि अगर आपके हार्मोन असंतुलित हैं, तो जिद्दी फैट को कम करना किसी मुश्किल टास्क से कम नहीं होता है। 

जानिए वजन बढ़ने के 4 हार्मोनल कारण

मेनोपॉज के दौरान पेट की चर्बी बढ़ना

मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलाव देखे जाते हैं। इस दौरान महिलाओं के कूल्हों और जांघों की तुलना में पेट के आसपास की चर्बी बढ़ने की ज्यादा संभावना होती है। हालांकि यह जरूरी भी नहीं है कि सिर्फ हार्मोनल बदलाव की वजह से मेनोपॉज में वजन बढ़ने लगे। कई बार बढ़ती उम्र और बदलती लाइफस्टाइल के साथ ही आनुवंशिक कारणों से भी वजन बढ़ने लगता है। इसके अलावा हेल्दी खाना न खाना, व्ययाम व करना और अच्छी नींद न लेना भी मेनोपॉज के बाद वजन बढ़ने का कारण बन सकते है। बता दें कि अच्छी नींद न लेने पर भी ज्यादा कैलोरी का सेवन करते हैं। 

एंडोमेट्रियोसिस

एक रिसर्च के मुताबिक एंडोमेट्रियोसिस और वजन बढ़ने आपस में संबंध होता है। कई लोगों का कहना है कि इस कारण से वजन बढ़ने और पेट फूलने की समस्या हुई है। वहीं एक रिसर्च में यह भी पाया गया है कि एंडोमेट्रियोसिस से ग्रसित लोगों का वजन तेजी से बढ़ता है। या फिर उन लोगों को वेट लॉस करने में काफी मुश्किल आती है। 

पीसीओएस

महिलाओं में प्यूबर्टी के समय पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम से हार्मोन समस्या सामने आती है। यह इंसुलिन बॉडी में शर्करा और स्टार्च को ऊर्जा में बदलने में सहायक होती है। पीसीओएस बॉडी में इंसुलिन हार्मोन का उपयोग करने में दिक्कत पैदा करता है। उच्च इंसुलिन का स्तर यानी की एण्ड्रोजन एक पुरुष हार्मोन है। यह उसके उत्पाजन को बढ़ाता है। एण्ड्रोजन का स्तर बढ़ने से मुंहासे, पीरियड्स में अनियमितता, शरीर के बालों की ग्रोथ और वजन बढ़ने का कारण होता है। एण्ड्रोजन के कारण वजन बढ़ने की समस्या होती है। 

हाइपोथाइरॉयड

थायरॉयड आपके मेटाबॉलिजम को संतुलित करने के साथ ही भूख को नियंत्रित करने का काम करता है। थायराइड हार्मोन आपकी मांसपेशियों, लीवर, वसा कोशिकाओं और मस्तिष्क आदि के अलावा कई ऊतकों के साथ संपर्क बनाते हैं। वहीं जब थायराइड का स्तर कम होता है, तब मेटाबॉलिजम भी धीमा हो जाता है। ऐसे में आपकी ऊर्जा कम खर्च होने लगती है। जिससे वजन बढ़ने लगता है। 

प्रमुख खबरें

IndiGo 20th Anniversary: 20 हजार फ्री Domestic Flight Tickets का बड़ा ऐलान, जानिए कैसे मिलेगा पूरा Refund

Mansukh Mandaviya ने राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेताओं को किया सम्मानित

Raheja Developers के चेयरमैन और एमडी को दिल्ली अदालत से गिरफ्तारी पर अंतरिम राहत

SEBI द्वारा REIT और InvIT यूनिट के बदले डिपॉजिटरी रसीद की अनुमति देने पर विचार