By दिव्यांशी भदौरिया | Apr 18, 2026
चारधाम यात्रा हिंदू धर्म की अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तीर्थ यात्राओं में गिनी जाती है, जिसे करना आसान नहीं होता। इस साल 2026 में इस यात्रा की शुरुआत अक्षय तृतीया के शुभ अवसर से होगी यानी के 19 अप्रैल 2026 को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे, वहीं केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के द्वार कुछ दिनों बाद दर्शन के लिए खुलेंगे। इस लेख में हम आपको चारधाम यात्रा का शुभारंभ और शेड्यूल के बारे में बताएंगे।
हिमायल की पहाड़ियों में बसे ये चारों धाम श्रृद्धालुओं को मोक्ष रास्ता दिखाते हैं और पापों से मुक्ति दिलाते हैं। इस साल अक्षय तृतीया के दिन शुभ योगों में चारधाम यात्रा के कपाट खुल जाएंगे। आइए आपको इस लेख में बताते हैं गंगोत्री-यमुनोत्री से लेकर केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन कब से शुरु हो रहे हैं।
चारधाम यात्रा 2026 का शुभारंभ
चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन दिन से होने जा रही है। इस शुभ अवसर पर यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के द्वार एक साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके बाद केदारनाथ धाम 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ धाम 23 अप्रैल को दर्शन हेतु खुलेगा। अक्षय तृतीया पर बन रहे शुभ संयोगों के चलते इस यात्रा का आरंभ बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है।
यमुनोत्री धाम- यात्रा का पहला पड़ाव
चारधाम में से यमुनोत्री पहला धाम है। 19 अप्रैल 2026 को इसके कपाट खुलने जा रहे हैं। यहां पर मां यमुना की काले संगमरमर की मूर्ति स्थापित है। यहां सूर्यकुंड और गर्म पानी के झरने भक्तों को आकर्षित करते हैं। यमुनोत्री के दर्शन करने से आयु, आरोग्य और पापों से मुक्ति मिलती है। यात्रा शुरु होने से पहले भक्त यहीं दर्शन करते हैं।
गंगोत्री धाम: गंगा मां का उद्गम स्थल
19 अप्रैल 2026 को गंगोत्री धाम के कपाट खुल जाएंगे। यह गंगा नदी का उद्गम स्थल है। माना जाता है कि राजा भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने धरती पर मां गंगा को उतारा था। गंगोत्री धाम में मां गंगा की मूर्ति विराजमान है। यहां के दर्शन से भक्तों को आध्यात्मिक शुद्धि और पापमुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
केदारनाथ धाम: भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग
22 अप्रैल 2026 को केदरनाथ के कपाट सुबह 8 बजे खुल जाएंगे। यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। धार्मिक कथा के अनुसार, पांडवों की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें यहां पर दर्शन दिए थे। मंदिर में शिवलिंग बैल की पीठ के आकार में है। गौरीकुंड से पैदल या हेलीकॉप्टर से पहुंचा जा सकता है। माना जाता है कि केदारनाथ के दर्शन करने से भक्तों के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
बद्रीनाथ धाम: भगवान विष्णु का प्रमुख पीठ
चारधाम यात्रा के चौथे और अंतिम पड़ाव के रूप में बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को प्रातः 6:15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इस पवित्र स्थल पर भगवान विष्णु नर-नारायण के रूप में विराजते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वे यहां वर्ष के छह महीने योगनिद्रा में रहते हैं और शेष छह महीने जाग्रत अवस्था में भक्तों को दर्शन देते हैं। बद्रीनाथ धाम में अखंड ज्योति निरंतर प्रज्वलित रहती है। ऐसा विश्वास है कि यहां दर्शन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
चारधाम यात्रा की तैयारी और सावधानियां
चारधाम यात्रा काफी कठिन और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, इसलिए रवाना होने से पहले अपना हेल्थ चेकअप जरूर करवा लें। सफर के लिए आरामदायक जूते, गर्म कपड़े और आवश्यक दवाइयों को साथ रखना बेहद जरूरी है। यात्रा के दौरान सादगीपूर्ण व्यवहार, श्रद्धा और अनुशासन का पालन करें। इस साल अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर शुरू हो रही यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्य और सौभाग्य का प्रतीक मानी जा रही है।
चारधाम यात्रा का आध्यात्मिक महत्व क्या है?
चारधाम यात्रा सिर्फ तीर्थ दर्शन नहीं है, बल्कि यह आत्म-शुद्धि, पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग है। गंगोत्री और यमुनोत्री से गंगा-यमुना की पवित्रता, केदारनाथ से शिव की कृपा और बद्रीनाथ से विष्णु की शरण मिलती है। माना जाता है कि इस यात्रा को पूरा करने वाला व्यक्ति जीवनभर पुण्य का भागीदार बन जाता है।