By अभिनय आकाश | Sep 24, 2026
मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने, जो MPs और MLAs से जुड़े मामलों की सुनवाई करती है, महाराष्ट्र के मंत्री और NCP नेता छगन भुजबल को भ्रष्टाचार के एक मामले में बरी कर दिया है। यह मामला मुंबई यूनिवर्सिटी के कलीना कैंपस में सेंट्रल लाइब्रेरी के कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा था। यह केस एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 2015 में तब दर्ज किया था, जब भुजबल महाराष्ट्र के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के मंत्री थे। कोर्ट ने गुरुवार को भुजबल और दूसरे आरोपियों को बरी कर दिया। हालांकि, इस फैसले का विस्तृत आदेश अभी उपलब्ध नहीं था।
कलिना लाइब्रेरी केस क्या है?
ACB ने जून 2015 में मुंबई यूनिवर्सिटी के कलिना कैंपस में सेंट्रल लाइब्रेरी बनाने का कॉन्ट्रैक्ट देने में कथित गड़बड़ियों के सिलसिले में यह केस दर्ज किया था। उस समय PWD मंत्री रहे भुजबल पर जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि उन्हें इस कॉन्ट्रैक्ट के बदले कथित तौर पर रिश्वत मिली थी। इसके बाद ACB ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की। उस समय एजेंसी के आरोपों के मुताबिक, भुजबल से जुड़े एक ट्रस्ट को किए गए पेमेंट का संबंध लाइब्रेरी प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट देने से था। आरोपियों ने इन आरोपों से इनकार किया था। यह मामला उन भ्रष्टाचार के मामलों में से एक था जो भुजबल के कार्यकाल के दौरान पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) द्वारा संभाले गए कॉन्ट्रैक्ट्स में कथित गड़बड़ियों की व्यापक जांच से सामने आए थे।
कलीना लाइब्रेरी का मामला भुजबल की उन लंबी कानूनी लड़ाइयों का हिस्सा रहा है, जो PWD मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में दिए गए कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े आरोपों की वजह से शुरू हुई थीं। ACB ने 2016 में एक डिटेल्ड चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें लाइब्रेरी बनाने का कॉन्ट्रैक्ट देने में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था। एजेंसी का आरोप था कि भुजबल से जुड़े एक ट्रस्ट को किए गए पेमेंट, प्रोजेक्ट में शामिल डेवलपर को दिए गए फायदों से जुड़े थे। इन कथित लेन-देन और कॉन्ट्रैक्ट देने के तरीके पर बाद में स्पेशल कोर्ट में सुनवाई हुई।