Prabhasakshi's NewsRoom| LAC के पार चीनी निर्माण को लेकर CDS और विदेश मंत्रालय के बयानों में दिखा विरोधाभास !

By नीरज दुबे | Nov 12, 2021

नमस्कार। न्यूजरूम में आप सभी का स्वागत है। चीन एलएसी पर अपनी साइड गांवा बना रहा है जिसको लेकर भारत में चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। इस प्रकार की खबरों पर प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) बिपिन रावत ने कहा है कि चीनियों के भारतीय क्षेत्र में आने और एक नया गांव बनाने के बारे में जारी विवाद ‘‘सही नहीं’’ है और संदर्भित गांव वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के उस पार पड़ोसी देश के क्षेत्र में है। सीडीएस रावत ने साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि चीन ने एलएसी की भारतीय ‘अवधारणा’ का उल्लंघन नहीं किया है।

हालांकि सीडीएस रावत ने 'टाइम्स नाउ समिट 2021' में कहा, ‘‘जहां तक हमारा सवाल है, एलएसी की तरफ हमारी ओर ऐसा कोई गांव नहीं बना है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा विवाद कि चीनी हमारे क्षेत्र में आ गए हैं और एक नया गांव बनाया है, यह सही नहीं है।’’ सीडीएस ने कहा, ‘‘हालांकि मैं जो कहना चाहता हूं वह यह है कि चीनी संभवतः एलएसी के साथ लगते क्षेत्र में अपने नागरिकों या अपनी सेना के लिए गांवों का निर्माण कर रहे हैं, खासकर हालिया संघर्ष के बाद।’’ सीडीएस रावत ने यह भी कहा कि भारतीय और चीनी, दोनों सेनाओं की एलएसी पर अपनी-अपनी चौकियां हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जहां भी चीन ने अपनी चौकियां विकसित की हैं, हमने उस क्षेत्र में मौजूद कुछ पुरानी जर्जर झोपड़ियां देखी थी।’’ उन्होंने कहा कि इसलिए, उनमें से कुछ झोपड़ियों को तोड़ दिया गया है और नए बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है और आधुनिक झोपड़ियां भी बन रही हैं।

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उन्होंने कहा, ‘‘हां, हो सकता है कि उनमें से कुछ गांवों का आकार बढ़ गया हो। मुझे लगता है कि शायद ये चीनी सैनिकों के लिए हैं और बाद में, वे कभी-कभी अपने परिवारों के आने पर उनकी सुविधा के लिए ये योजना बना रहे होंगे। ... हमारे नागरिक वहां जा रहे हैं, हमारे परिवार अग्रिम क्षेत्रों में जा रहे हैं, इसलिए वे यह सब देख रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि चीनी सैनिक अलग-थलग हैं। सीडीएस रावत ने कहा, ‘‘वे (चीनी सैनिक) मुख्य भूमि से हजारों मील दूर रह रहे हैं। और वे हमारे लोगों को देखते हैं कि वे बहुत प्रसन्न मुद्रा में हैं। उन्हें बहुत जल्दी-जल्दी घर जाने को मिलता है।’’ उन्होंने कहा कि एलएसी पर तैनात भारतीय सैनिकों को साल में तीन बार नहीं तो कम से कम दो बार घर जाने की छुट्टी मिलती है। उन्होंने कहा कि चीनी सैनिकों के पास यह सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘वे इस बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहे हैं, इस तरह के तथाकथित गांव, जो एलएसी के पार उनके क्षेत्र में हैं। उन्होंने एलएसी की हमारी अवधारणा का कहीं भी उल्लंघन नहीं किया है।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें लगता है कि इस तरह के गांव का विकास उनकी (चीन) ओर से धौंस दिखाने का एक प्रयास है, उन्होंने जवाब दिया, ‘‘बिल्कुल नहीं, मैं इसे धौंस जमाना नहीं कहूंगा। इन गांवों के विकास के साथ, वे यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि वे अपने सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच बनायें। यह कुछ ऐसा है जो हमें भी करना चाहिए।’’ हम आपको बता दें कि भारत अपने सीमा क्षेत्र के विकास के बारे में भी चिंतित है और सरकार ने बीएडीपी (सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम) परियोजनाओं के लिए धन जारी किया है।

दूसरी ओर, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि भारत अपनी सुरक्षा पर प्रभाव डालने वाले सभी घटनाक्रमों पर निरंतर नजर रखता है और अपनी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता की हिफाजत के लिए सभी आवश्यक कदम उठाता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ राजनयिक माध्यमों से सदा ही अपने कड़े विरोध से चीन को अवगत कराया है तथा भविष्य में भी ऐसा करना जारी रखा जाएगा।’’ उन्होंने कहा कि भारत ने सड़कों, पुलों आदि के निर्माण सहित सीमा पर बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है, जिसने स्थानीय आबादी को सीमा पर अत्यावश्यक संपर्क उपलब्ध कराया है। बागची ने कहा, ‘‘सरकार अरूणाचल प्रदेश में सहित अपने नागरिकों की आजीविका को बेहतर करने के लिए सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे का निर्माण करने के लक्ष्य के लिये प्रतिबद्ध है।’’

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