By अंकित सिंह | Jul 31, 2024
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत अक्सर महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा करते हैं। वहीं, हाल ही में वह उत्तर प्रदेश के अमरोहा में श्री दयानंद गुरुकुल कॉलेज में एक नए भवन के उद्घाटन में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान एक छात्र ने भागवत से पूछा कि उन्होंने अब तक भारत के प्रधान मंत्री जैसा कोई प्रमुख पद या कोई अन्य महत्वपूर्ण भूमिका क्यों नहीं निभाई? इसके जवाब में भागवत ने कहा कि उनके जैसे कार्यकर्ता यहां सत्ता में रहने के लिए नहीं बल्कि देश की सेवा करने के लिए हैं।
उन्होंने कहा, "हमने तय किया कि हमारी कीमत क्या है...हमें खुद को पूरी तरह से राष्ट्र के प्रति समर्पित करके काम करना चाहिए। इसलिए, हमने शुरू से ही ऐसे पदों के लिए दरवाजे बंद कर दिए हैं।" भागवत ने यह भी उल्लेख किया कि आरएसएस निर्देश देता है कि क्या किया जाना चाहिए और वह उसी के अनुसार पालन करता है। आरएसएस प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा या इच्छा नहीं है, उन्होंने कहा, "व्यक्ति के रूप में हम कुछ भी नहीं हैं। हमने सब कुछ छोड़ दिया है। हमारा वश चले तो हम अपना नाम-रूप भी त्याग दें, परंतु संघ में इसकी अनुमति नहीं है।”