रूसी मिलिट्री बेस का सर्वे करने पहुंचा चीन, भारत को झटका!

By अभिनय आकाश | Jun 08, 2026

रूस  और चाइना के बीच सैन्य सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है और यही बात भारत के लिए चिंता का कारण बनती दिखाई भी दे रही थी। अभी हाल ही में खबर आई थी कि भारत में रूस का चौथा S400 रेजीमेंट का पहला खेप पहुंचा है कि उधर रशियन मीडिया में भी एक रिपोर्ट छपी कि इस हफ्ते चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी की एक निरीक्षण टीम ने रूस के पूर्वी सैन्य जिले का दौरा किया। इस दौरान टीम ने कई सैन्य ठिकानों का निरीक्षण किया। जिनमें एयर डिफेंस मिसाइल यूनिट भी शामिल थी। यही इलाका रूस के पूर्वी क्षेत्र में आता है जो रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। यह दौरा किसी अचानक घटना का हिस्सा नहीं था बल्कि 1990 के दशक में बने बॉर्डर ट्रस्ट बिल्डिंग मैकेनिज्म के तहत किया गया था। 

इसे भी पढ़ें: India-China Tension के बीच Beijing से संदेश, Ambassador Doraiswami ने याद दिलाई 2000 साल की दोस्ती

वहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी टीम के अधिकारियों ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग आपसी समझ और भरोसे पर आधारित है और इसे और आगे बढ़ाया जाएगा। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने भी चीन को रूस का स्वाभाविक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश पड़ोसी हैं और उनका सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है बल्कि आपसी हितों पर आधारित है। हालांकि इस दौरे में सबसे बड़ी बात यह रही कि रूस ने जिस एयर डिफेंस यूनिट का निरीक्षण कराया उसके बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। इससे यह सवाल भी उठने लगा कि क्या दोनों देश धीरे-धीरे अपने सैन्य सिस्टम को और करीब ला रहे हैं। पिछले कुछ सालों में रूस और चीन के बीच सैन्य सहयोग काफी तेजी से बढ़ा। दोनों देशों के बीच कई बार संयुक्त सैन्य अभ्यास भी देखने को मिला और रूसी राष्ट्रपति पहले भी यह कह चुके हैं कि रूस और चीन के रिश्ते अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुके हैं। भारत लंबे समय से अपनी रक्षा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर रहा है। आज भी भारतीय सेना के बड़े हिस्से में इस्तेमाल होने वाले हथियार और सिस्टम रूस या पूर्व सोवियत संघ से आए हैं। अनुमान के मुताबिक भारत के लगभग आधे से ज्यादा सैनी प्लेटफार्म किसी ना किसी रूप में रूसी तकनीक से जुड़े हैं। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम सबसे महत्वपूर्ण है। भारत के पास मौजूद S400 मिसाइल सिस्टम इग्ला एस मैनपड्स और पुराने पैचोरा जैसे सिस्टम रूस की तकनीक पर आधारित है। ऐसे में अगर रूस और चीन के बीच सैन्य तकनीक और सिस्टम का आदान-प्रदान बढ़ता है तो भारत के लिए चिंता बढ़ सकती है।

प्रमुख खबरें

Aviation Sector में Adani-GMR की एंट्री का विरोध, IndiGo प्रमुख बोले- निष्पक्ष Competition के लिए यह खतरनाक

HCL Tech का Odisha में बड़ा दांव, ₹14,257 करोड़ के निवेश से बनेगा भारत का पहला Sovereign AI Data Center

अब तक बनाए गए 10.18 करोड़ से अधिक किसान पहचान पत्र, सरकार ने राज्यसभा में दी जानकारी

Japanese Yen Crash: 1986 के बाद सबसे निचले स्तर पर मुद्रा, Satsuki Katayama ने दिए Currency Market में दखल के संकेत