By अंकित सिंह | Oct 07, 2022
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में चीन के अशांत जिनजियांग के हालात से जुड़े मसौदे के प्रस्ताव पर वोटिंग से भारत दूर रहा है। उइगर मुसलमानों के साथ व्यवहार मामले में चीन के खिलाफ ये प्रस्ताव लाया गया था। हालांकि, चीन के साथ सीमा पर तनाव के बावजूद भी भारत ने उसका साथ दिया है। भारत के चीन के खिलाफ प्रस्ताव पर मतदान से दूर रहा। मानवाधिकार समूह चीन के उत्तर-पश्चिमी चीनी प्रांत में मानवाधिकार हनन की घटनाओं को लेकर सालों से आवाज उठाते रहे हैं। चीन पर आरोप लगाया गया है कि 10 लाख से ज्यादा कोई घरों को उनकी इच्छा के खिलाफ हिरासत में रखा गया है। भारत और 10 अन्य देशों ने मतदान से दूरी बनाया जिसके कारण चीन के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव खारिज हो गया।
47 सदस्यीय परिषद में इस प्रस्ताव का गिरना अमेरिका व पूरी पश्चिमी देशों के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा सकता है। पश्चिम देशों को इस बात की उम्मीद थी कि चीन के खिलाफ लाए गए इस प्रस्ताव में उन्हें भारत का साथ मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दरअसल, भारत शुरु से कहता रहा है कि यूएनएचआरसी जैसे संगठन में किसी देश को निशाना बनाना सही नहीं है। भारत को इस बात की भी आशंका रहती है कि भविष्य में उसके खिलाफ इस तरह के प्रस्ताव पेश किए जा सकते हैं। पाकिस्तान आए दिन जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाता रहता है। यही कारण है कि सीमा पर तनाव के बावजूद भी भारत ने चीन का परोक्ष रूप से साथ दिया है। इसको लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने ट्वीट कर लिखा कि 'चीन पर इतनी झिझक क्यों? भारत सरकार चीनी घुसपैठ पर संसदीय बहस के लिए सहमत नहीं होगी। UNHRC में शिनजियांग में मानवाधिकार पर बहस के लिए लाए प्रस्ताव से भारत दूर रहेगा। विदेश मंत्रालय सांसदों को ताइवान जाने के लिए राजनीतिक मंजूरी नहीं देगा।' वहीं शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि हिंदी चीनी भाई-भाई। लाल आंख से लेकर बंद आंख तक का सफर।