दक्षिण एशिया में भारत की कोई गहरी और लंबी समर-नीति है या नहीं ?

By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Jul 31, 2020

गलवान घाटी के हत्याकांड पर चीन ने चुप्पी साध रखी है। लेकिन वह भारत पर सीधा कूटनीतिक या सामरिक हमला करने की बजाय अब उसके घेराव की कोशिश कर रहा है। घेराव का मतलब है, भारत के पड़ोसियों को अपने प्रभाव-क्षेत्र में ले लेना ! चीन के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और नेपाल के विदेश मंत्रियों के साथ एक संयुक्त वेबिनार किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री कोरोनाग्रस्त हैं, इसलिए एक दूसरे मंत्री ने इस वेबिनार में भाग लिया। यह संयुक्त बैठक की गई कोरोना से लड़ने के उद्देश्य को लेकर लेकिन उसमें हुए संवाद का जितना विवरण हमारे सामने आया है, उससे क्या पता चलता है ? उसका एक मात्र लक्ष्य था, भारत को दक्षिण एशिया में अलग-थलग करना।

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वांग ने कोरोना से लड़ने के बहाने चीन के सामरिक लक्ष्यों को भी जमकर आगे बढ़ाया। उसने अपनी ‘रेशम महापथ’ की योजना में अफगानिस्तान को भी शामिल कर लिया। चीन अब हिमालय के साथ हिंदूकुश का सीना चीरकर ईरान तक अपनी सड़क ले जाएगा। यदि यह सड़क पाकिस्तानी कश्मीर से होकर नहीं गुजरती तो शायद भारत इस पर एतराज नहीं करता लेकिन असली सवाल यह है कि दक्षिण एशिया में भारत की कोई गहरी और लंबी समर-नीति है या नहीं ? वह सारे दक्षिण एशिया को थल-मार्ग और जल-मार्ग से जोड़ने की कोई बड़ी नीति क्यों नहीं बनाता ?

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

(लेखक, भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष हैं)

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