सब ट्रंप के टैरिफ में लगे थे, चीन ने LAC के पास किया कुछ ऐसा, भारत के लिए खतरे की घंटी

By अभिनय आकाश | Aug 12, 2025

एक तरफ भारत को लेकर चीन की बहुत ही मजबूत कोशिश है कि भारत के साथ व्यापार को मजबूत किया जाए। अमेरिका को जवाब दिया जाए और रूस, भारत, चीन गठबंधन फिर से एक बड़े अलायंस के तौर पर पूरी दुनिया को अपने ऊपर केंद्रित कर ले। दूसरी तरफ चीन की वो कोशिशें हैं जो भारत को बार बार ये सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर चीन दोस्ती या दुश्मनी चाहता क्या है? हम एक बार फिर से इसी दोराहे पर आकर खड़े हो गए हैं। चीन के साथ व्यापार को लेकर बातचीत है जो ऐसे समय पर होने वाली है। वो भी ऐसे समय में जब अमेरिका की तरफ से लगातार टैरिफ की घोषणा हो रही है और रूस पर भी दवाब बढ़ रहा है। दूसरी तरफ चीन की विस्तारवादी नीति के तहत बनने वाली वो परियोजनाएं हैं जो फिर से एक अस्थिरता की स्थिति को पैदा कर सकता है। 

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खबर आ रही है कि चीन अब एक नए प्रोजेक्ट के साथ भारत चीन सीमा पर हड़कंप मचाने वाला है। चीन ने शिनजियांग और तिब्बत रेल नेटवर्क पर काम करने का प्लान जारी कर दिया। इसे लेकर एक बड़े स्तर पर शिनजियांग से लेकर तिब्बत तक एक पूरा रेल नेटवर्क बनाया जाएगा। ये भारतीय सीमा से बहुत करीब होगा। हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट पर काम इसी साल शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए चीन ने एक नई कंपनी ''शिनजियांग-तिब्बत रेलवे कंपनी'' (एक्सटीआरसी) बनाई है। इसे करीब 1.10 लाख करोड़ रुपए की शुरुआती पूंजी दी गई है। यह रेल प्रोजेक्ट चीन के सबसे बड़े और रणनीतिक महत्व वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है। इसका मकसद 2035 तक ल्हासा को केंद्र बनाकर 5 हजार किमी लंबा रेल नेटवर्क तैयार करना है। 

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2006 में तिब्बत तक रेलवे के उद्घाटन के बाद से, दो और लाइनें बनी हैं; 2014 में ल्हासा-शिगात्से रेल और 2021 में ल्हासा-न्यिंगची लाइन। भारत की सीमाओं पर रेल निर्माण और भी उल्लेखनीय हो गया है, क्योंकि ल्हासा-न्यिंगची रेलमार्ग दक्षिण-पूर्व में अरुणाचल प्रदेश की सीमा की ओर जाता है, और इसे आगे पूर्व में चेंगदू तक विस्तारित करने की बात चल रही है, जो पश्चिमी चीन का एक प्रमुख सैन्य केंद्र है। बीजिंग की योजनाओं में नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित भूमि बंदरगाह ग्यारोंग और भारत-भूटान-चीन त्रि-संधि पर चुम्बी घाटी में यादोंग काउंटी तक रेलमार्ग को आगे बढ़ाना भी शामिल है। यह वही संवेदनशील स्थान है जहाँ 2017 में चीन के सड़क निर्माण को लेकर डोकलाम में सैन्य गतिरोध हुआ था। 

बीजिंग अब तिब्बत में और भी अंदर तक रेल की पटरियाँ बिछा रहा है। यह सिर्फ़ भारत की सीमा के पास चीनी बाँधों की बात नहीं है, बल्कि रेल की पटरियाँ भी हैं। भारत के पूर्वी क्षेत्र के साथ-साथ, चीनी रेल भारत की उत्तरी सीमा तक पहुँचने वाली है, जो उतनी ही संवेदनशील है और भारत के लिए चिंता का विषय होगी। चीन अब तक का अपना सबसे महत्वाकांक्षी रेल संपर्क बनाने की तैयारी में है। यह रेल लाइन उसके उत्तर-पश्चिमी शिनजियांग प्रांत, जो उइगरों का गढ़ है, को तिब्बत से जोड़ेगी। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2008 में मूल रूप से नियोजित इस परियोजना के कुछ हिस्से भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास से गुजरेंगे।

 

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