रेगिस्तान में किला, मिसाइल सिटी, ईरान जैसा हथियारों का पाताल लोक तैयार कर रहा चीन, ड्रैगन के प्लान से अमेरिका के उड़े होश!

By अभिनय आकाश | May 30, 2026

चीन अपने दूरदराज के उत्तर-पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके में लॉन्च पैड (लॉन्चिंग साइट्स), मजबूत किलेबंद सुविधाओं और संचार बुनियादी ढांचे का एक बहुत बड़ा नेटवर्क बना रहा है। एक अमेरिकी शोधकर्ता  ने इसे बीजिंग के परमाणु बलों की सुरक्षा और उनके बचे रहने की क्षमता को मजबूत करने का एक ऐसा प्रयास बताया है जो "पहले कभी नहीं देखा गया। बताया जा रहा है कि चीन रेगिस्तान में परमाणु चक्रव्यूह बिछा रहा है। चीन ने अमेरिका को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। ऐसा तीन लेयर का न्यूक्लियर चक्रव्यूह जिसे अमेरिका के लिए भेदना नामुमकिन हो जाए। सेटेलाइट से आई कुछ नई और बेहद चौंकाने वाली तस्वीरों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। इन तस्वीरों में चीन के उत्तर पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके में बड़े पैमाने पर सैन्य निर्माण गतिविधियां दिखाई दी हैं। यह कोई साधारण निर्माण नहीं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन यहां अपने परमाणु हथियारों और लंबी दूरी की मिसाइलों के लिए ऐसा सुरक्षा कवच तैयार कर रहा है जो युद्ध की स्थिति में उसकी सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकता है। चीन की एक पुरानी रणनीति रही है कि वह सुनसान और दूरदराज के इलाकों में अपनी सबसे गोपनीय सैन्य परियोजना को अंजाम देता है। जहां आम लोगों की पहुंच नहीं होती। जहां विदेशी निगरानी सीमित होती है और जहां दुश्मन के लिए गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल होता है।  

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हाल ही में अप्रैल और मई के दौरान इस इलाके में चीनी सेना की बड़े सैन्य गतिविधि भी देखी गई। सेटेलाइट तस्वीरों में मिसाइल बैट्रियां, भारी सैन्य ट्रक और बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास के संकेत दिखाई दिए। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई कि चीन केवल निर्माण नहीं कर रहा बल्कि इस नेटवर्क को सक्रिय रूप से ऑपरेशनल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार चीन की असली चिंता अमेरिका की तथाकथित फर्स्ट स्ट्राइक क्षमता है। यानी अगर कभी युद्ध की स्थिति में अमेरिका पहले हमला करे तो चीन के परमाणु हथियार नष्ट हो जाए। इसी खतरे से बचने के लिए चीन अपनी सेकंड स्ट्राइक क्षमता को मजबूत कर रहा है। सेकंड स्ट्राइक का मतलब है पहला हमला झेलने के बाद भी दुश्मन पर विनाशकारी जवाबी हमले करने की क्षमता बनाए रखना। इस रणनीति का एक और अहम हिस्सा है चीन का अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम। वायन वन नामक सेटेलाइट नेटवर्क सिस्टम दुश्मन की मिसाइल लॉन्च होने के कुछ ही सेकंड बाद उसका पता लगा सकता है और कुछ मिनटों के भीतर सैन्य कमांड को अलर्ट भेज सकता है। यानी अगर किसी देश ने चीन पर अचानक हमला करने की कोशिश की तो चीन को जवाबी कारवाई के लिए महत्वपूर्ण समय मिल सकता है। हालांकि चीन आधिकारिक तौर पर नो फर्स्ट यूज़ नीति की बात करता रहा है और कहता है कि वह पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। लेकिन पश्चिमी देशों और कई सुरक्षा विशेषज्ञों को डर है कि ताइवान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच यह परमाणु ढांचा रणनीतिक दबाव बनाने का बड़ा हथियार बन सकता है। पेंटागन पहले ही चेतावनी दे चुका है कि चीन दुनिया में सबसे तेजी से अपना न्यूक्लियर शस्त्रगार बढ़ा रहा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले सालों में चीन के पास 1000 से ज्यादा परमाणु वॉर हेड हो सकते हैं। 

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