By Ankit Jaiswal | Apr 09, 2026
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच एक चीनी एकेडमिक के बयान ने वैश्विक स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है और उनके आकलन को लेकर रणनीतिक हलकों में गंभीर बहस हो रही है।
गौरतलब है कि जियांग ने पहले भी कहा था कि ईरान के साथ किसी बड़े युद्ध में अमेरिका को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है और अमेरिकी नेतृत्व को अपने रुख में नरमी लानी पड़ सकती है हैं। हाल के घटनाक्रम, जिसमें अमेरिका की ओर से अस्थायी युद्धविराम की सहमति देखने को मिली, के बाद उनके इस आकलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
बता दें कि जियांग का मानना है कि भले ही अमेरिका सीधे टकराव से बचने की कोशिश करे, लेकिन हालात ऐसे बन सकते हैं कि उसे अंततः जमीनी स्तर पर सैन्य हस्तक्षेप करना पड़े हैं। उनके अनुसार केवल हवाई हमलों के जरिए लंबे समय तक किसी संघर्ष को नियंत्रित करना संभव नहीं होता और इससे अमेरिका धीरे-धीरे गहरे संघर्ष में फंस सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान सीमित संसाधनों के बावजूद रणनीतिक लचीलापन दिखा रहा है और संघर्ष की दिशा को अपने हिसाब से प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है हैं। उनका मानना है कि किसी भी युद्ध में केवल सैन्य ताकत नहीं, बल्कि रणनीति में बदलाव की क्षमता ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।
गौरतलब है कि जियांग ने अमेरिकी सैन्य रणनीति की आलोचना करते हुए इसे “उल्टे पिरामिड” जैसा बताया, जहां हवाई ताकत को ज्यादा महत्व दिया जाता है और जमीनी सैनिकों की भूमिका सीमित रखी जाती है हैं। उनके अनुसार यह तरीका लंबे और जटिल युद्धों में प्रभावी साबित नहीं होता है।
बता दें कि वर्ष 2024 के एक व्याख्यान में उन्होंने तीन बड़े पूर्वानुमान भी किए थे, जिनमें अमेरिकी चुनाव, ईरान के साथ संभावित युद्ध और उसके वैश्विक असर की बात शामिल थी हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसा कोई संघर्ष विश्व व्यवस्था को लंबे समय के लिए बदल सकता है।