By Ankit Jaiswal | Jan 30, 2026
चीन के फुटबॉल में लंबे समय से चल रही गड़बड़ियों पर आखिरकार बड़ा एक्शन देखने को मिला है। बता दें कि चीनी फुटबॉल संघ ने गुरुवार को मैच फिक्सिंग और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कड़ा फैसला लेते हुए 73 लोगों पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है, जिनमें पूर्व राष्ट्रीय टीम कोच ली टिए भी शामिल हैं। इसके साथ ही 13 पेशेवर फुटबॉल क्लबों पर आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
गौरतलब है कि यह कार्रवाई राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चल रहे व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में इस अभियान के तहत कई शीर्ष फुटबॉल अधिकारियों को पद से हटाया गया है और दर्जनों खिलाड़ियों पर सट्टेबाजी और मैच फिक्सिंग के आरोपों में प्रतिबंध लगाया जा चुका है हैं। चीनी फुटबॉल संघ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया बयान में कहा कि यह फैसले एक “व्यवस्थित समीक्षा” के बाद लिए गए हैं, जिनका उद्देश्य खेल में अनुशासन लागू करना, फुटबॉल के माहौल को साफ करना और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखना है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, संघ ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि हालिया मैच फिक्सिंग की घटनाएं किस समय की हैं या किन मुकाबलों से जुड़ी हैं। हालांकि, संघ का कहना है कि जांच में सामने आए सबूत इतने गंभीर थे कि कठोर दंड आवश्यक हो गया।
बता दें कि ली टिए, जो इंग्लिश क्लब एवर्टन के लिए भी खेल चुके हैं और 2019 से 2021 तक चीन की राष्ट्रीय टीम के कोच रहे थे, पहले से ही रिश्वतखोरी के मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं। उन्हें दिसंबर 2024 में दोषी ठहराया गया था। वहीं, पूर्व चीनी फुटबॉल संघ अध्यक्ष चेन शूयुआन को भी करीब 1.1 करोड़ डॉलर की रिश्वत लेने के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
क्लब स्तर पर भी इस फैसले का बड़ा असर पड़ा है। 2025 चीनी सुपर लीग की 16 में से 11 टीमें अगले सीजन में अंक कटौती और जुर्माने का सामना करेंगी। मौजूद जानकारी के अनुसार, तियानजिन जिनमेन टाइगर और पिछले सीजन की उपविजेता शंघाई शेनहुआ को 2026 सत्र की शुरुआत में 10-10 अंक गंवाने होंगे और 10 लाख युआन का जुर्माना देना होगा। लगातार तीन बार की चैंपियन शंघाई पोर्ट और बीजिंग गुओआन पर पांच-पांच अंक की कटौती के साथ 4 लाख युआन का जुर्माना लगाया गया।
फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि इस सख्त कार्रवाई से चीन में पेशेवर फुटबॉल की साख सुधारने की कोशिश की जा रही है। लंबे समय से भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रहे चीनी फुटबॉल के लिए यह कदम एक नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि इसका असर आने वाले सीजन में लीग की प्रतिस्पर्धा पर भी साफ दिखेगा।