सिर्फ पांच सांसदों के दम पर मोदी सरकार के लिए U-Turn फैक्टर बने चिराग पासवान, NDA के अन्य सहयोगी रह गए पीछे

By अंकित सिंह | Aug 21, 2024

लोजपा नेता और एनडीए के अहम सहयोगी चिराग पासवान लगातार सुर्खियों में हैं। हाल में ही एनडीए में होने के बावजूद भी उन्होंने मोदी सरकार के फैसले का खुलकर विरोध किया। लोकसभा में पेश वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर भी चिराग पासवान की राय भाजपा से पूरी तरह से अलग है। सिर्फ पांच सांसदों वाली पार्टी के प्रमुख चिराग ने यह भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से सहमत नहीं है कि एससी कोटे को उपवर्गीकृत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर करेगी।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि चिराग पासवान पांच सांसदों के साथ वो काम कैसे कर पा रहे हैं जैसा एनडीए के अन्य सहयोगी नहीं कर पा रहे हैं। टीडीपी (16 सांसद), जेडीयू (12 सांसद) और शिवसेना (7 सांसद) में से पांच सांसदों वाली एलजेपी एनडीए खेमे में सबसे मुखर सहयोगी बन गई है, जिसने सरकार के यू-टर्न में बड़ा रोल निभाया है। चिराग पासवान सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं। अतीत में, उन्होंने खुद को नरेंद्र मोदी का 'हनुमान' कहा था और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनडीए में शामिल होने तक उनके मुखर आलोचक थे। 

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एलजेपी के सूत्रों का कहना है कि पासवान जमीनी स्तर पर अपनी बात रखते हैं और जातिगत मुद्दों से वाकिफ हैं जो एनडीए को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं। उनका कहना है कि यह 2015 का ‘बिहार सबक’ है जब मोहन भागवत की ‘आरक्षण समीक्षा’ टिप्पणी ने विधानसभा चुनावों में भाजपा की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया था और जेडीयू-आरजेडी गठबंधन ने ‘आरक्षण खत्म करने’ के मुद्दे पर भाजपा की आलोचना करके घर-घर जाकर जीत हासिल की थी। पासवान अखिल भारतीय जाति जनगणना की भी वकालत कर रहे हैं, जिसका भाजपा विरोध करती है।

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