By एकता | Aug 23, 2026
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आरक्षण-विरोधी प्रदर्शनों पर अपनी राय रखी। पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कांग्रेस के संसद मार्ग थाने के बाहर धरने और चीनी के बढ़ते दामों पर भी अपनी बात रखी।
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि आरक्षण कोई खैरात नहीं, बल्कि एक संवैधानिक अधिकार है। इसे किसी के मांगने से खत्म नहीं किया जा सकता। जाति की जगह आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग पर उन्होंने साफ किया कि एनडीए सरकार पहले ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू कर चुकी है।
चिराग पासवान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन करके 'वंदे मातरम' विवाद से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसका इस्तेमाल मूल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए करना गलत है। कांग्रेस नेतृत्व इस समय 'वंदे मातरम' के अनादर से जुड़े सवालों से घिरा हुआ है।
पटना में छात्रों के प्रदर्शन को राजद नेता तेजस्वी यादव द्वारा दिए गए समर्थन पर पासवान ने कहा कि विपक्ष के नेता होने के नाते यह उनकी जिम्मेदारी के अनुरूप है और यह अच्छी बात है। देश में चीनी की कीमतों में हो रही वृद्धि पर चिंता जताते हुए केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार इस समस्या के जल्द समाधान पर काम कर रही है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के पीछे हालिया समय में देश में गर्माए कुछ प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे हैं। हाल के महीनों में देश के विभिन्न राज्यों में जातिगत जनगणना और आरक्षण का दायरा (50% की सीमा) बढ़ाने को लेकर मांगें तेज हुई हैं। इसके विरोध में एक तबका, विशेषकर गैर-आरक्षित वर्ग, सड़कों पर उतरा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का आधार 'जाति' के बजाय केवल 'आर्थिक स्थिति' होना चाहिए ताकि जरूरतमंदों को इसका लाभ मिल सके।