CJI Chandrachud ने अपनी रिटारटमेंट से ठीक पहले कई सुलगते सवालों के दिये जोरदार जवाब

By नीरज कुमार दुबे | Nov 05, 2024

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़़ ने कहा है कि गणपति पूजा पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उनके आधिकारिक आवास पर आने में “कुछ भी गलत नहीं” था और ऐसे मुद्दों पर “राजनीतिक हल्कों में परिपक्वता की भावना” की जरूरत है। हम आपको याद दिला दें कि प्रधानमंत्री के प्रधान न्यायाधीश के आवास पर जाने के बाद कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों और वकीलों के एक वर्ग ने इसके औचित्य और न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण को लेकर चिंता जताई थी। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आलोचनाओं को दरकिनार करते हुए कहा था कि ‘‘यह देश की संस्कृति का हिस्सा है।’’

इसे भी पढ़ें: बच्चों को खेलने की जगह नहीं देंगे तो…सुप्रीम कोर्ट ने शहरी नियोजन के तरीकों पर गंभीर चिंता जताई

सीजेआई ने प्रधानमंत्री के उनके आवास पर आने के बारे में कहा, “प्रधानमंत्री गणपति पूजा के लिए मेरे घर आए। इसमें कुछ भी गलत नहीं है क्योंकि सामाजिक स्तर पर न्यायपालिका और कार्यपालिका से जुड़े व्यक्तियों के बीच निरंतर बैठकें होती हैं। हम राष्ट्रपति भवन में, गणतंत्र दिवस आदि पर मिलते हैं। हम प्रधानमंत्री और मंत्रियों से बात करते हैं। इस दौरान उन मामलों पर बात नहीं होती, जिनपर हमें फैसला लेना होता है, बल्कि सामान्य रूप से जीवन और समाज से जुड़े मामलों पर बात होती है।” दस नवंबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे सीजेआई ने कहा, “इसे समझने और अपने न्यायाधीशों पर भरोसा करने के लिए राजनीतिक व्यवस्था में परिपक्वता की भावना होनी चाहिए, क्योंकि हम जो काम करते हैं उसका मूल्यांकन हमारे लिखित शब्दों से होता है। हम जो भी निर्णय लेते हैं उसे गुप्त नहीं रखा जाता है और उसपर खुलकर चर्चा की जा सकती है।”

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच होने वाली बातचीत का न्यायिक पक्ष से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, "शक्तियों के पृथक्करण में यह प्रावधान है कि न्यायपालिका को कार्यपालिका की भूमिका नहीं निभानी चाहिए जो नीतियां निर्धारित करती है, क्योंकि नीति निर्धारण की शक्ति सरकार के पास है। इसी तरह कार्यपालिका अदालती मामलों पर निर्णय नहीं करती। बातचीत होनी चाहिए क्योंकि आप न्यायपालिका में लोगों के भविष्य और जीवन के बारे में फैसला कर रहे होते हैं।” सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच बातचीत का अदालती मामलों पर होने वाले फैसलों से कोई लेना-देना नहीं है। सीजेआई ने कहा, "यह मेरा अनुभव रहा है।"

इसके अलावा अयोध्या राम मंदिर विवाद के समाधान के लिए भगवान से प्रार्थना करने संबंधी उनके बयान पर भी काफी हंगामा हुआ था। उन्होंने खुद को सभी धर्मों का सम्मान करने वाला ''आस्थावान व्यक्ति'' बताया। सीजेआई ने कहा, "यह सोशल मीडिया की समस्या है। आपको उस पृष्ठभूमि के बारे में भी बताना चाहिए, जिसके तहत मैंने वह बात कही थी।” उन्होंने वह बयान अभिनंदन समारोह के दौरान खेड़ तालुका में अपने पैतृक गांव कन्हेरसर के निवासियों को संबोधित करते हुए दिया था। सीजेआई ने कहा था कि उन्होंने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में एक समाधान के लिए भगवान से प्रार्थना की थी।

चंद्रचूड़ ने कहा था कि अगर किसी के अंदर आस्था हो तो भगवान रास्ता निकाल देगा। उन्होंने कहा, “अक्सर हमारे सामने (फैसले के लिए) मामले आते हैं लेकिन हम किसी समाधान पर नहीं पहुंच पाते। ऐसा ही कुछ अयोध्या (राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद) के दौरान हुआ जो तीन महीने तक मेरे सामने था। मैं भगवान के सामने बैठा और उनसे कहा कि उन्हें कोई समाधान ढूंढना होगा।” यह पूछे जाने पर कि क्या वह गणेश पूजा की तस्वीर के फ्रेम में थोड़ा बदलाव करके उसमें नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) और शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों को भी लाना चाहेंगे तो चंद्रचूड़ ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि वह एलओपी को शामिल नहीं करेंगे क्योंकि यह केंद्रीय सतर्कता आयुक्त या सीबीआई के निदेशक की नियुक्ति के लिए चयन समिति नहीं है। उन्होंने कहा, “विवाह, मृत्यु जैसे अवसरों पर, मुलाकातें होती हैं। जब मेरी मां की मृत्यु हुई, तो राज्य के मुख्यमंत्री मुझसे मिलने आए थे। ये प्राथमिक शिष्टाचार हैं। हमें समझना चाहिए कि न्यायपालिका में परिपक्वता की भावना है, इसलिए हम पर भरोसा करें। न्यायाधीशों पर दोषारोपण करना समाज को बदनाम करना है।”

दिल्ली दंगा मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुनवाई में देरी संबंधी एक सवाल का जवाब देते हुए सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि मीडिया में एक विशेष मामले को महत्व दिया जाता है और फिर उस विशेष मामले पर अदालत की आलोचना की जाती है। उन्होंने कहा, “सीजेआई के रूप में कार्यभार संभालने के बाद, मैंने जमानत मामलों को प्राथमिकता देने का फैसला किया क्योंकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित है। यह निर्णय लिया गया कि शीर्ष अदालत की प्रत्येक पीठ को कम से कम 10 जमानत मामलों की सुनवाई करनी चाहिए। नौ नवंबर, 2022 और एक नवंबर, 2024 के बीच उच्चतम न्यायालय में 21,000 जमानत याचिकाएं दायर की गईं। इस अवधि के दौरान 21,358 जमानत याचिकाओं का निस्तारण किया गया।''

प्रमुख खबरें

जहां से हुआ था भारत पर कब्जा, ट्रेड रूट बंद करना था कारण, Strait of Hormuz की ये कहानी क्या आपको पता है?

Dacoit: Ek Prem Katha Releases | क्या आप जानते हैं? Mrunal Thakur से पहले Shruti Haasan ने शूट किए थे Adivi Sesh की फिल्म के कुछ सीन

बाबर आजम का टी20 क्रिकेट में बड़ा रिकॉर्ड, इस मामले में क्रिस गेल और कोहली को पछाड़ा

Morarji Desai Death Anniversary: पहले Non-Congress PM जिन्हें मिला Bharat Ratna, जानें क्यों Pakistan ने भी दिया सर्वोच्च सम्मान