By राकेश सैन | Jul 29, 2026
गिद्धों का भी एक धर्म होता है, वो जिंदा जानवरों का मांस नहीं खातीं। वह प्रतीक्षा करती हैं उसके मरने की और प्राण छोडऩे के बाद ही लोथड़ों को नोचती हैं। लेकिन आज का इंसान गिद्ध से भी ज्यादा विभत्स हो गया लगता है। नीट पेपर लीक को लेकर देश भर में प्राण गंवाने वाले 21 युवाओं के पोस्टर लगा कर दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देने वाली कॉकरोच जनता पार्टी के नेता इन युवाओं का शोक मनाना तो दूर बल्कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद फाइव स्टार होटलों में कुल्हे मटकाते और बोतलों के ढक्कन खोलते दिखे। पेपर लीक मामले में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र हो गया और लगभग एक महीने से दिल्ली के जंतर मंतर पर लोकतंत्र की नई-नई रखवाली कॉकरोच जनता पार्टी का धरना भी खत्म हो गया पर दो दिनों के भीतर ही इन नए नवेले लोकतंत्र के रखवालों का असली चेहरा सामने आने लगा है। नीट पेपर लीक होने के आक्रोश में मारे गए जिन युवाओं के पोस्टर लगा कर कोहराम मचाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं ने इतना तमाशा किया वो अपने साथियों को भूखे मरता छोड़ खुद फाइव स्टार होटलों में ठुमके लगाते और बीयर पार्टी करते हुए दिखाई दिए। लाशों के मंच पर लग रहे ठुमके और उड़ रही शराब की दुर्गंध इस बात की साक्षी है कि इस तरह की हरकत करने वालों के मनों में कितनी सड़ांध भरी होगी।
ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि किसी आंदोलन के खत्म होने के दो दिनों बाद ही उसमें फूट पड़ती दिख रही हो। आखिर पड़े भी क्यों ना, कुछ लोगों ने देश के युवाओं के आक्रोश का लाभ उठाया और देखते ही देखते वे दुनिया में अभियानवादियों के स्टार बन गए। उनकी कही बातें अब इंटरनेशनल मीडिया में गूंज रही हैं और उनकी भाव भंगिमा ऐसी है मानो उन्होंने बहुत बड़ा मार्का मार लिया हो। लेकिन क्या फाइव स्टार होटलों में गुलछर्रे उड़ाने वाले जेन-जी नेता बताएंगे कि आंदोलन के दौरान कितनी बार पेपर लीक के मृतकों को याद किया गया। केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे के बाद काक्रोचों ने अहंकारमयी मुद्रा में आकर कहा कि ‘झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए।’ सीजेपी के नेता जीत के जश्न में उन लोगों को क्यों भूल गए जिन्होंने अपनी जानें दीं। उन परिवारों को क्यों नहीं बुलाया गया जिन्होंने अपने बच्चों को खोया। असल में कुछ अभियानवादियों ने इन 21 युवाओं की लाशों का मंच की तरह उपयोग किया और अपना कद बड़ा कर चलते बने। कहने को ये जेन-जी वाले शिक्षा नीति में सुधार का नारा लेकर आए थे परंतु इनका असली नारा यही दिखता है कि ‘अपना काम है बनता-भाड़ में जाए जनता।’ ऐसे मुर्दाखोर आंदोलनकारियों पर तो शायद गिद्धों को भी शर्म आ जाए।
- राकेश सैन
32 खण्डाला फार्म कालोनी,
ग्राम एवं डाकखाना रंधावा मसंदां,
जालन्धर।