Climate Change और भूजल संकट से निपटने को वैज्ञानिक दृष्टिकोण जरूरी: विशेषज्ञ

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 04, 2026

लखनऊ, तीन नवंबर लखनऊ में जलवायु शिखर सम्मेलन में विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने मंगलवार को भूजल की कमी, मिट्टी की घटती उर्वरता, अनियमित मानसून और ऊर्जा की बढ़ती मांग जैसी समस्याओं से निपटने के लिए एकीकृत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि एक-दूसरे से जुड़ी ये समस्याएं कृषि उत्पादन और ग्रामीण लोगों की आजीविका के लिए खतरा पैदा कर रही हैं। यहां आयोजित सम्मेलन में विशेषज्ञों ने खेती पर निर्भर समुदायों को इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाने के लिए पुनर्योजी कृषि (रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर), सौर ऊर्जा, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जल संरक्षण के उपायों और मौसम के बेहतर पूर्वानुमान को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

स्थानीय और वैश्विक स्तर पर समाधान तलाशने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को अधिक समर्थन देने की आवश्यकता है।’’ आईआईटी कानपुर के कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी के डीन प्रोफेसर सच्चिदानंद त्रिपाठी ने कहा कि सिधु-गंगा के मैदान देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इस क्षेत्र में मिट्टी की घटती गुणवत्ता, भूजल की कमी, मौसम में बदलाव और ऊर्जा की बढ़ती मांग जैसी एक-दूसरे से जुड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इन चुनौतियों से निपटने के लिए हमें अलग-अलग उपाय करने के बजाय ऐसे एकीकृत और वैज्ञानिक समाधान अपनाने होंगे, जिन्हें बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके।’’ आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने कहा कि उपजाऊ भूमि होने के बावजूद इस क्षेत्र में कृषि जोत का आकार घटने, जल संसाधनों की कमी तथा फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इनका असर फसल उत्पादन और ग्रामीण आय पर पड़ रहा है।

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