By अभिनय आकाश | Oct 17, 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ में डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए भारत के राजनीतिक और संवैधानिक इतिहास के कुछ अहम पलों को याद किया। इनमें 1975 में आपातकाल (इमरजेंसी) लागू होना और अनुच्छेद 370 को हटाना शामिल है। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने 1975 के आपातकाल का जिक्र किया और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस हंसराज खन्ना द्वारा जताई गई असहमति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उस दौर ने देश को 'कानून के शासन' (rule of law) और 'कानून के जरिए शासन' के बीच का अंतर सिखाया। मुख्यमंत्री ने कहा यह वही उत्तर प्रदेश है, जिसके हाई कोर्ट ने 12 जून को भारत के सबसे शक्तिशाली पद पर बैठे व्यक्ति का चुनाव रद्द कर दिया था। ठीक 13 दिन बाद, इसके बदले में देश में आपातकाल लगा दिया गया... उस समय सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस हंसराज खन्ना ने अकेले असहमति जताई थी, और उन्हें इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी। लेकिन इतिहास कभी बेकार नहीं जाता। हाल ही में आपने देखा होगा कि 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने उसी अकेली असहमति को सही माना। 1975 ने देश को 'कानून के शासन' और 'कानून के जरिए शासन' के बीच का फर्क सिखाया। देश के लिए 1975 का यही सबक है।