By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 05, 2026
पणजी, पांच नवंबर कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोयला गैसीकरण परियोजनाओं से आयात के विकल्प तैयार होने के बाद अगले पांच से सात वर्षों में भारत को विदेशी मुद्रा में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। दत्त ने दक्षिण गोवा में खनन एवं कोयला क्षेत्र में सुधारों पर आयोजित खनन मंत्रियों के चौथे सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए दो योजनाओं के तहत 46,000 करोड़ रुपये की वित्तीय प्रोत्साहन राशि देने की प्रतिबद्धता जताई है। अधिकारी ने कहा कि जिम्मेदार खनन कंपनियों के लिए ‘‘विवेक के साथ खनन’’ मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए।
दत्त ने बताया कि ओडिशा और महाराष्ट्र पहले ही कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन नीतियां लागू कर चुके हैं। ओडिशा के अंगुल जिले और महाराष्ट्र के चंद्रपुर क्षेत्र में समूहों के रूप में परियोजनाएं शुरू हो रही हैं। उन्होंने झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे कोयला समृद्ध राज्यों से भी निवेशकों को प्रोत्साहन देने वाली नीतियां बनाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि इससे परियोजनाएं आकर्षित करने और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ संसाधन संपन्न क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं पर जोर देते हुए दत्त ने कहा कि गैसीकरण संयंत्रों से जुड़े उद्योगों में रोजगार पैदा होंगे और कुशल तथा अर्ध-कुशल श्रमिकों को लाभ होगा। इसके अलावा, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होंगी और अतिरिक्त आर्थिक गतिविधियां पैदा होंगी।
कोयला क्षेत्र में सुधारों पर दत्त ने कहा कि 2020 में शुरू की गई वाणिज्यिक खनन नीति ने कोयले के अंतिम उपयोग और बिक्री पर लगी पाबंदियां हटा दी थीं, जिससे निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी का रास्ता खुला। उन्होंने कहा कि नीलामी के 15 दौर के जरिये 137 खदानें आवंटित की गई हैं। देश के कुल कोयला उत्पादन में कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने खनिजों की खोज करने के लिए अधिकृत एजेंसियों की संख्या भी 13 सरकारी एजेंसियों से बढ़ाकर 57 कर दी है। इनमें 44 मान्यता प्राप्त निजी एजेंसियां शामिल हैं। पर्यावरण संबंधी पहलों का उल्लेख करते हुए दत्त ने कहा कि कोयला मंत्रालय ने तीन वर्षों में वैज्ञानिक तरीके से बंद करने के लिए 147 खदानों की पहचान की है, जिनमें से 43 को पहले ही वैज्ञानिक तरीके से बंद किया जा चुका है।
उन्होंने साथ ही बताया कि मंत्रालय ने बंद खदानों के आकलन और उनके दोबारा उपयोग को सुगम बनाने के लिए ‘सुविकल्प’ नाम से एक डिजिटल उपकरण विकसित किया है। इस अवसर पर केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी, खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत मौजूद थे।