Chai Par Sameeksha: Modi से सत्ता छीनकर क्या फिर से देश में रिमोट कंट्रोल PM लाना चाहती है Congress

By अंकित सिंह | Jul 24, 2023

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क  के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह NDA बनाम I.N.D.I.A गठबंधन, संसद मानसून सत्र 2023, मणिपुर-राजस्थान-पश्चिम बंगाल और बिहार में महिला असम्मान से जुड़ी घटनाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान प्रभासाक्षी संपादक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में एनडीए की पहली बड़ी बैठक हुई। इसमें 39 दल शामिल हुए और सभी ने 50 प्रतिशत से ज्यादा मत हासिल कर तीसरी बार सत्ता में लौटने का संकल्प लिया। सवाल उठ रहे हैं कि मोदी एनडीए की बैठक करने को क्यों मजबूर हुए? दरअसल मोदी 2004 वाली गलती दोहराना नहीं चाहते। तत्कालीन भाजपा नेतृत्व ने एनडीए छोड़कर जाने वाले दलों को मनाने में रुचि नहीं दिखाई थी जबकि कांग्रेस ने यूपीए का गठन कर तमाम क्षेत्रीय दलों को साथ लिया और एनडीए को सत्ता से बाहर कर दिया। अब कांग्रेस 2004 वाला प्रयोग दोहराने की कोशिश कर रही है इसलिए मोदी और भाजपा सतर्क हैं।

प्रभासाक्षी संपादक ने कहा कि एक ओर जहां एनडीए 350 सीट जीतने की बात कर रहा है तो वही विपक्षी गठबंधन इंडिया का दावा है कि हम 450 सीटों पर साझा उम्मीदवार उतारेंगे। लेकिन उन्होंने यह बात साफ तौर पर कहा कि दोनों के दावों में कितना दम है, यह चुनाव परिणाम के बाद ही सामने आएगा। प्रभासाक्षी संपादक ने साफ तौर पर कहा कि इस गठबंधन से आम जनता के कितने फायदे होंगे, इस पर सवाल बना रहेगा। लेकिन चुनाव नजदीक आते ही यह देखने को मिल रहा है कि नेताओं ने दल बदलना शुरू कर दिया है। विपक्षी एकता के गठबंधन के नाम इंडिया को आकर्षक बताते हुए प्रभासाक्षी के संपादक ने कहा कि क्या आप भारत को अच्छी तरीके से समझते हैं? इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इंडिया के मंच पर जो भी नेता थे उनमें से कोई ऐसा नहीं है जो किसी न किसी आरोप से लगे ना हो। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि फिलहाल बैठ कर बात कर लेने भर से बहुत कुछ नहीं हो जाता। इस गठबंधन की असली परीक्षा तो सीट बंटवारे के समय होगी। देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस और लेफ्ट का बंगाल में क्या रुख होता है। दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस क्या करती हैं?

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राजनीतिक गर्मी बढ़ी रहेगी

प्रभासाक्षी संपादक ने कहा कि संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत में ही कांग्रेस ने जो सख्त तेवर दिखाये हैं उससे आसार यही हैं कि दोनों सदनों में सभी कार्यदिवसों में राजनीतिक गर्मी बढ़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि कुल 17 कार्यदिवसों में सरकार ने 31 विधेयक पारित कराने की तैयारी की है लेकिन विपक्ष के रुख को देखते हुए आशंका है कि कहीं बजट सत्र की तरह इस बार भी हंगामे के बीच ही विधेयक पारित ना कराये जाएं। यदि ऐसा होता है तो संसदीय लोकतंत्र के प्रति लोगों की आस्था कम होगी और यह सवाल भी उठेगा कि जब बजट से लेकर किसी साधारण विधेयक तक को हंगामे और शोरशराबे के बीच ही पारित कराना है तो फिर संसद की जरूरत ही क्या है?

मणिपुर घटना

प्रभासाक्षी संपादक ने कहा कि मणिपुर में दो महिलाओं के साथ अमानवीयता का जो वीडियो सामने आया है वह सभ्य समाज के माथे पर बहुत बड़ा कलंक है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि हिंसा की हर वारदात का सबसे बड़ा खामियाजा महिलाओं को भुगतना पड़ता है। आरोपियों को जल्द से जल्द और सख्त से सख्त सजा दिलाना इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जिस देश की संस्कृति नारी की पूजा करना सिखाती है वहां महिलाओं के साथ ऐसा अत्याचार कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। प्रभासाक्षी संपादक ने कहा कि मणिपुर की घटना को लेकर देश में जो आक्रोश है वह स्वाभाविक है क्योंकि महिला सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। परंतु महिलाओं के सम्मान के विषय में दोहरापन भी नहीं रखना चाहिए। मणिपुर की महिलाओं के साथ ही हमें राजस्थान और पश्चिम बंगाल में हालिया जघन्य हमलों की शिकार हुईं महिलाओं को भी न्याय दिलाना चाहिए। महिला विरोधी अपराधों में तभी कमी आ सकती है जब इस पर राजनीति बंद होगी और प्रत्येक मामले में कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति पर चलते हुए जल्द और सख्त फैसला लिया जायेगा। 

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