अदालत ने ब्लैक फंगस के उपचार में उपयोगी दवाओं के वितरण को लेकर नीति बनाने के निर्देश दिये

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 01, 2021

नयी दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह ‘भारी मन’ से केंद्र को निर्देश दे रहा है कि ब्लैक फंगस के उपचार में उपयोगी लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी के वितरण के लिये नीति बनाई जाए, जिसमें युवा पीढ़ी के मरीजों को प्राथमिकता दी जाए क्योंकि यही देश का निर्माण करेगी और उसे आगे ले जाएगी। उच्च न्यायालय ने कहा कि दवा देते समय यह ध्यान रखा जाए कि जिनके जीवित रहने की बेहतर संभावना है, उन्हें एवं कम आयु वर्ग के लोगों को, उन वृद्धों की तुलना में प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिन्होंने अपनी जिंदगी जी ली है। उसने यह भी कहा कि इससे सभी नहीं तो, कुछ जिंदगियां जरूर बचायी जा सकती हैं।

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पीठ ने कहा, ‘‘ यदि सभी मरीजों का उपचार नहीं किया जा सकता... तो केंद्र पर मरीजों की प्राथमिकता के संबंध में अपनी नीति बताने की जिम्मेदारी आती है ताकि कम से कम कुछ जिंदगियां तो बचायी जा सकती हैं।’’ न्यायालय ने कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञों की मदद से नीतिगत निर्णय लिये जा सकते हैं। उसने कहा कि इस दवा की दिल्ली समेत पूरे देश में पिछले दो सप्ताह से कमी है और लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन -बी की कमी एवं अन्य वैकल्पिक दवा की जानकारी नहीं होने से बड़ी संख्या में मौतें हो रही हैं। अदालत ने कहा कि यह सही वक्त है कि विभिन्न रोगों के मरीजों के उपचार के लिए दिशानिर्देश तय करने वाली भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ब्लैक फंगस के उपचार के सिलसिले में लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन -बी, एम्फोटेरिसिन -बी,और पोसाकोनाजोन के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करे।

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