By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 11, 2026
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अनिश्चितता तथा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अगले सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए समझौते की उम्मीद से कीमतों में कुछ गिरावट भी आ सकती है। विश्लेषकों ने यह राय जताई है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड में जिंस शोध प्रमुख नवनीत दमानी ने कहा कि संघर्ष के विस्तार से क्षेत्र के रास्ते होने वाली ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी शामिल है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर पिछले सप्ताह अक्टूबर में आपूर्ति वाले कच्चे तेल के वायदा भाव में 35 रुपये यानी 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 8,881 रुपये प्रति बैरल पर बंद हुआ।
हालांकि, नवंबर अनुबंध 82 रुपये यानी करीब एक प्रतिशत बढ़कर 8,828 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया। दमानी ने कहा, कच्चे तेल की कीमतें कूटनीतिक उम्मीदों और वास्तविक आपूर्ति में बने जोखिमों के बीच झूल रही हैं। युद्ध से पहले करीब 6,500 रुपये प्रति बैरल के स्तर के मुकाबले एमसीएक्स पर कच्चे तेल का 8,500 रुपये से ऊपर बने रहना दर्शाता है कि कीमतों में आपूर्ति जोखिम का बड़ा प्रीमियम अब भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के प्रस्ताव पर ईरान की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने पर निकट अवधि में कीमतों में और गिरावट आ सकती है। हालांकि, पिछले अनुभव बताते हैं कि केवल कूटनीतिक प्रगति से आपूर्ति में लंबे समय तक सुधार सुनिश्चित नहीं होता। इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और अमेरिका तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर सैन्य हमला नहीं करेगा।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा कि वैश्विक बाजारों के लिए अमेरिका-ईरान कूटनीतिक बातचीत और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े घटनाक्रम महत्वपूर्ण बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की रूपरेखा पर प्रगति से ऊर्जा की कीमतें घट सकती हैं। इससे भारत के आयात बिल और रुपये को कुछ राहत मिल सकती है।
वहीं, भू-राजनीतिक तनाव दोबारा बढ़ने से बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।