By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 29, 2026
नयी दिल्ली, 29 जुलाई सरकार और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) को तेजी से बढ़ रहे क्लाउड सेवा बाजार में संभावित प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है। कट्स इंटरनेशनल की बुधवार को जारी रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया। कंज्यूमर यूनिटी एंड ट्रस्ट सोसायटी (कट्स इंटरनेशनल) की दो रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिस्पर्धा आयोग क्लाउड सेवा प्रदाताओं से जुड़ी सॉफ्टवेयर लाइसेंसिंग गतिविधियो की गहन जांच शुरू करने पर विचार कर सकता है।
इनके जरिये कंपनियां और उपभोक्ता बिना भौतिक हार्डवेयर खरीदे जरूरत के अनुसार सर्वर, स्टोरेज और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर सकते हैं। कट्स इंटरनेशनल के अध्ययन में सरकार या भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को उद्योग के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने की सिफारिश की गई है, ताकि क्लाउड सेवा प्रदाताओं को ब्रिटेन के प्रतिस्पर्धा एवं बाजार प्राधिकरण के समक्ष की गई अपनी स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं को भारतीय बाजार में भी लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इनमें डेटा बाहर ले जाने के शुल्क को माफ करना और विभिन्न क्लाउड प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना शामिल है।
रिपोर्ट में कहा गया कि क्लाउड सेवा बाजार में सामने आने वाली अधिकांश प्रतिस्पर्धा संबंधी चिंताओं का समाधान प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत किया जा सकता है। साथ ही, तकनीकी बाधाओं को कम करने के लिए इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी विचार किया जा सकता है। कट्स इंटरनेशनल के महासचिव प्रदीप एस. मेहता ने कहा कि क्लाउड सेवाएं भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी हस्तक्षेप को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए जिससे अत्यधिक नियमन से बचते हुए नवोन्मेष, प्रतिस्पर्धा और वृद्धि को बढ़ावा मिले।’’ दोनों रिपोर्ट में बाजार की निरंतर निगरानी, समय-समय पर प्रतिस्पर्धा आकलन, विभिन्न प्रौद्योगिकी प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल और आसान डेटा हस्तांतरण की सुविधा और प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।