CV Raman Birth Anniversary: सीवी रमन ने विज्ञान से लगाव की वजह से ठुकराया था उपराष्ट्रपति बनने का प्रस्ताव

By अनन्या मिश्रा | Nov 07, 2023

आधुनिक विज्ञान के क्षेत्र में सीवी रमन का योगदान काफी अहम स्थान रखता है। वैसे तो उन्हें रमन प्रभाव के लिए ज्यादा जाना जाता है। जिसके लिए सीवी रमन को नोबेल पुरस्कार भी मिला था। आधुनिक काल में भारतीय विज्ञान के विकास में सीवी रमन का योगदान अतुलनीय है। आज ही के दिन यानी की 7 नवंबर को सीवी रमन का जन्म हुआ था। स्पैक्ट्रोमैट्री के क्षेत्र में उनके सिद्धांत ने क्रांतिकारी योगदान दिया है जो आज के अंतरिक्ष विज्ञान के शोध में बहुत काम आता है। आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर सीवी रमन के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...


जन्म 

तमिलनाडु के तिरुचिरापल्‍ली नामक स्थान में 7 नवम्बर सन 1888 को सीवी रमन का जन्म हुआ था। उनके पिता चन्द्रशेखर अय्यर एसपीजी कॉलेज में भौतिकी के प्राध्यापक थे। वहीं उनका मां पार्वती अम्मल एक सुसंस्कृत परिवार की महिला थीं। सीवी रमन की शुरूआती शिक्षा विशाखापत्तनम में हुई। बारह वर्ष की अल्पावस्था में ही सर चन्द्रशेखर वेंकटरामन ने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी।

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डा. रमन शोध करने और नोबल पुरस्कार जीतने से पहले सरकारी नौकरी किया करते थे और अपनी शादीशुदा जिंदगी गुजार रहे थे। साल 1906 में एम. ए. की परिक्षा पास करने के बाद वह वित्त विभाग के जनरल एकाउंटेंट के पद पर नौकरी करने लगे थे। सीवी रमन सरकारी नौकरी में इतना ऊंचा पद पाने वाले रमन पहले भारतीय थे। लेकिन यह नौकरी उनको ज्यादा समय तक रास नहीं आई। उन्होंने रामायण, महाभारत जैसे धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया।


भौतिकी का नोबेल 

सरकारी नौकरी से साल 1917 में त्याग पत्र देने के बाद कलकत्ता के एक नए साइंस कॉलेज में भौतिक विज्ञान का अध्यापक बन गए। यहां पर उनके पास भौतिकी से जुड़े रहने का मौका था। उनका भौतिकी के प्रति इसी जुड़ाव ने सीवी रमन को भौतिकी के क्षेत्र में सम्मान दिलाया। डा. रमन ने अपने शोध कार्य को ना सिर्फ आगे बढ़ाने के काम किया बल्कि उसमें सफलता भी हासिल की। सीवी रमन ने साल 1922 में 'प्रकाश का आणविक विकिरण’' नामक मोनोग्राफ का प्रकाशन कराया। सीवी रमन ने प्रकाश के प्रकीर्णन की जांच के लिए प्रकाश के रंगो में आने वाले परिवर्तनों का निरिक्षण किया।


नोबेल पुरस्कार

सीवी रमन को साल 1930 में 'नोबेल पुरस्कार' के लिए चुना गया। रुसी वैज्ञानिक चर्ल्सन, रदरफोर्ड, नील्स बोअर, यूजीन लाक, चार्ल्स कैबी और विल्सन जैसे वैज्ञानिकों ने सीवी रमन के नाम को नोबेल पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया था। जिसके बाद साल 1954 में भारत सरकार की ओर से रमन को भारत रत्न की उपाधि से नवाजा गया। वहीं साल 1957 में उनको लेनिन शांति पुरस्कार प्रदान किया था। इसके अलावा साल 1952 में सीवी रमन के पास भारत का उपराष्ट्रपति बनने का प्रस्ताव आया।


सभी राजनितिक दलों ने इस पद के लिए उनके नाम का समर्थन किया था। ऐसे में सीवी रमन का निर्विरोध उपराष्ट्रपति चुना जाना लगभग तय था। लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। साथ ही विज्ञान कि दिशा में अपना काम जारी रखा।


निधन

साल 1948 में IISC से रिटायर होने के बाद सीवी रमन ने बेंगलुरु में ही 1949 में अपना रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट शुरू किया। जिसके बाद वह इस संस्थान के डायरेक्टर बने रहे। बता दें कि 21 नवंबर 1970 को सीवी रमन की मृत्यु हो गई।

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