By रेनू तिवारी | Jun 30, 2026
लोनावला के पास स्थित महाराष्ट्र का ऐतिहासिक लोहागढ़ किला इन दिनों एक बेहद अजीब और परेशान करने वाले कारण से सुर्खियों में है। देश को झकझोर देने वाले हाई-प्रोफाइल केतन अग्रवाल मर्डर केस का असर अब इस ऐतिहासिक स्मारक पर भी दिखने लगा है। News18 मराठी की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब से यह हत्याकांड सामने आया है, किले में आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि यहाँ आने वाले अधिकांश लोग किले के गौरवशाली इतिहास को देखने नहीं, बल्कि उस सटीक जगह को तलाशने आ रहे हैं जहाँ कथित तौर पर इस खौफनाक अपराध को अंजाम दिया गया था।
किले के एक हिस्से को अब अनौपचारिक (Informal) रूप से 'सिया पॉइंट' या 'सिया स्पॉट' कहा जाने लगा है। यह नाम इस मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल के नाम पर पड़ा है। सिया पर आरोप है कि उसने अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर, पुणे के पास घूमने के दौरान केतन अग्रवाल को किले से नीचे धकेल दिया था।
किले के स्थानीय गाइडों और दुकानदारों के मुताबिक, यहाँ आने वाले पर्यटक अब सुरक्षाकर्मियों और साथी यात्रियों से लगातार एक ही सवाल पूछ रहे हैं—"वह जगह कहाँ है जहाँ से केतन को नीचे फेंका गया था?" इस मानवीय उत्सुकता ने एक खूबसूरत और ऐतिहासिक ट्रेकिंग डेस्टिनेशन को 'डार्क टूरिज्म' (Tragedy Tourism) के केंद्र में बदल दिया है।
वीकेंड जैसी भीड़ अब आम दिनों में भी
लोहागढ़ किला हमेशा से महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय हेरिटेज स्थलों में से एक रहा है।
सामान्य दिनों का गणित: वीकेंड और छुट्टियों पर यहाँ आमतौर पर रोजाना 4,000 से 5,000 पर्यटक आते थे।
वर्तमान स्थिति: स्थानीय लोगों का कहना है कि मर्डर केस के बाद अब आम दिनों (Weekdays) में भी वीकेंड जैसी ही भारी भीड़ देखी जा रही है, और इस पूरी भीड़ का ध्यान सिर्फ तथाकथित 'सिया पॉइंट' पर केंद्रित है।
संरक्षणवादियों की चिंता: सोशल मीडिया मीम्स से छवि को नुकसान
पर्यटकों की इस बढ़ती और अनियंत्रित संख्या ने इतिहास और हेरिटेज संरक्षणवादियों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है।
सचिन टेकावाड़े, लोहागढ़ विसापुर विकास मंच की और से कहा गया कि "यह बेहद चौंकाने वाला और दुर्भाग्यपूर्ण है। इतनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण जगह का नाम एक मर्डर केस से जुड़ना बहुत परेशान करने वाला है। उससे भी ज़्यादा चिंताजनक बात यह है कि सोशल मीडिया पर लोहागढ़ किले को लेकर मीम्स और चुटकुलों की बाढ़ आ गई है। इस गंभीर घटना को हल्के में लेने से इस ऐतिहासिक स्मारक की छवि को भारी नुकसान पहुँच सकता है।"
2,000 साल से भी पुराना है लोहागढ़ का इतिहास
यह विवाद इसलिए भी बड़ा है क्योंकि लोहागढ़ कोई आम पर्यटन स्थल नहीं है। सह्याद्री पर्वत श्रृंखला में स्थित इस किले का इतिहास बेहद गौरवशाली है:
नाम का अर्थ: "लोहागढ़" का अर्थ है "लोहे का किला", जो इसके कभी न जीते जा सकने वाले मजबूत गढ़ को दर्शाता है।
प्राचीन नींव: यह किला लगभग 2,000 साल पुराना है और माना जाता है कि इसकी शुरुआती नींव सातवाहन काल में रखी गई थी। बाद के इतिहास में छत्रपति शिवाजी महाराज के काल में भी इस किले ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कैसे पहुँचें लोहागढ़?
महाराष्ट्र के मावल इलाके में स्थित यह किला लोनावला से लगभग 11 किलोमीटर और पुणे से करीब 60 किलोमीटर दूर है। यहाँ पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन माली (Malavli) है, जहाँ से पर्यटक आसानी से इस ऐतिहासिक स्मारक तक पहुँच सकते हैं।
प्रशासन अब इस बात पर विचार कर रहा है कि कैसे उस कथित घटना स्थल पर सुरक्षा बढ़ाई जाए और लोगों को इस ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुँचाने से रोका जा सके।
गौरवशाली इतिहास और छत्रपति शिवाजी महाराज का संबंध
इस किले का इतिहास लगभग 2,000 साल पुराना है। सातवाहन काल के बाद इस पर राष्ट्रकूट, चालुक्य, बहमनी और निजामशाही जैसे कई राजवंशों का राज रहा।
शिवाजी महाराज का नियंत्रण: छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1648 ईस्वी में इस पर कब्जा किया था।
पुरंदर की संधि (1665 ई.): मुगलों के बढ़ते दबाव के कारण शिवाजी महाराज को पुरंदर की संधि के तहत जो 23 किले मुगलों को सौंपने पड़े थे, उनमें लोहागढ़ भी शामिल था।
पुनः विजय: शिवाजी महाराज ने 1670 ईस्वी में मुगलों पर दोबारा हमला कर इस किले को वापस जीत लिया और इसका उपयोग अपने खजाने को सुरक्षित रखने के लिए किया। बाद में पेशवा काल में नाना फड़नवीस ने यहाँ कई नए निर्माण करवाए।
किले के प्रमुख आकर्षण (क्या देखने लायक है?)
विंचू काटा (Winchu Kata): यह इस किले का सबसे प्रसिद्ध हिस्सा है। किले के पश्चिमी छोर पर फैली हुई यह पहाड़ी हुबहू एक 'बिच्छू के डंक' (Scorpion's Tail) जैसी दिखाई देती है। इस संकरे रास्ते पर चलना रोमांच से भर देता है, जहाँ दोनों तरफ गहरी खाइयाँ हैं।
चार शानदार प्रवेश द्वार: किले में प्रवेश करने के लिए चार बड़े दरवाजे पार करने होते हैं, जो आज भी काफी मजबूत स्थिति में हैं— गणेश दरवाजा, नारायण दरवाजा, हनुमान दरवाजा और महा दरवाजा। महा दरवाजे पर की गई नक्काशी आज भी देखने लायक है।
भाजा और कार्ला गुफाएँ: लोहागढ़ के ठीक नीचे प्रसिद्ध भाजा गुफाएँ (Bhaja Caves) स्थित हैं, जो बौद्ध कालीन (लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व) हैं। इसके पास ही कार्ला गुफाएँ भी हैं।
वास्तुकला की विशेषता: पानी का बेहतरीन प्रबंधन
पहाड़ी की चोटी पर होने के बावजूद, किले के भीतर पानी की कभी कमी नहीं होती थी। यहाँ चट्टानों को काटकर बनाए गए कई बड़े तालाब और पानी के टांके (Water Tanks) मौजूद हैं। इनमें से एक बड़ा तालाब इतना विशाल है कि उसे 'हत्ती तलाव' (Elephant Tank) भी कहा जाता है।
जुड़वां किला: विसापुर (Visapur Fort)
लोहागढ़ के ठीक सामने उसका जुड़वां किला विसापुर स्थित है। ये दोनों किले एक ही पहाड़ी श्रृंखला का हिस्सा हैं और इनके बीच की घाटी को 'पवन मावल' कहा जाता है। पुराने समय में इन दोनों किलों का इस्तेमाल एक-दूसरे की सुरक्षा और निगरानी के लिए मिलकर किया जाता था।
ट्रेकिंग और घूमने का सबसे अच्छा समय
मानसून (जून से सितंबर): इस मौसम में लोहागढ़ किसी जन्नत जैसा दिखता है। पूरी पहाड़ी हरी घास की चादर से ढक जाती है, चारों तरफ धुंध (Fog) होती है और छोटे-छोटे झरने बहने लगते हैं। हालांकि, बारिश में यहाँ की सीढ़ियों पर काफी फिसलन हो जाती है, इसलिए सावधानी जरूरी है।
ट्रेक का स्तर: यह एक आसान से मध्यम (Easy to Moderate) स्तर का ट्रेक है। नीचे मालावली स्टेशन से ऊपर तक सीढ़ियाँ बनी हुई हैं, जिससे नए ट्रेकर्स और परिवार के लोग भी यहाँ आसानी से आ सकते हैं।