विकसित महसूस करने के दिन (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Apr 29, 2021

कोरोना की जानदार वापसी के बीच बेशक शमशान में जलने के लिए लाइन लगी है, लेकिन चाइनीज़ मान लिए गए कोरोनाजी का भारतीय वैरियंट भी मैदान में आ गया है। अपना वैरियंट न होने से पिछड़ा हुआ सा लग रहा था।  इस मामले में हम अपने पूर्व शासक ब्रिटेन वालों के मुकाबिल आ गए हैं । अमेरिका जैसे देश में बंदे भारतीय वैरियंट की गिरफ्त में हैं । उसके लिए भारतीय वैरियंट से कुश्ती लड़ना ज़्यादा दिलचस्प रहा होगा क्यूंकि यह वैरियंट स्ट्रेन डबल म्यूटेट है।  रहस्यात्मक यह है कि इसके दो रूप बताए जाते हैं। अब यह तो पता नहीं कि दोनों रूप नर हैं या एक मादा, लेकिन मुझे विशवास नहीं अंधविश्वास है कि इसने अपने नए रंग रूप, विश्वगुरुओं की उपजाऊ ज़मीन के खिलाड़ी गिरगिटों से, छवि बदल सकने की महीन प्रेरणा लेकर,  दो नहीं कई रूप विकसित कर लिए होंगे और  जानबूझकर अभी पता दो का ही बता रहा होगा।  कुछ भी हो, आगे आना, आगे बढ़ना, आगे निकलना और पहले स्थान पर आना तो विकास ही है । ऐसा करने के लिए बहुत मेहनत लगती है।

इसे भी पढ़ें: सही मुजरिम पकड़ने की शैली (व्यंग्य)

अब हमारी उपजाऊ सामाजिक मिटटी में रहकर कोरोनाजी की बाहरी कंटीली परत ज़्यादा मज़बूत हो गई है।  मोटी चमड़ी वाले हमारे खास लोगों की तरह, जिन पर किसी भी रोने और खोने का असर नहीं  होता। अब तो सम्मान की बात  गई है कि बात गलत ही करें और उसके ठीक बोलने का ढोल पीटें। अंधविश्वास को दवाई समझ लेना देशभक्ति घोषित कर दिया गया है। मानवता की लाशों के बीच, राजनीति का झंडा लहराना राष्ट्रीय कर्तव्य हो गया है। नैतिक सम्मान का विषय यह है कि जीवन के प्रति मोह खत्म होता जा रहा है शायद तभी उत्सव मनाने की आदतें छूटती नहीं । वैसे तो मौत को उत्सव मानना पहले से ही स्वीकृत है। 

- संतोष उत्सुक 

प्रमुख खबरें

Allahabad High Court ने हमीरपुर में स्कूल सड़क के लिए Forest NOC देने का आदेश दिया

Raipur Police के खिलाफ ईसाई संगठन का मोर्चा, दुर्व्यवहार के आरोप में कार्रवाई की मांग

JPNIC Lucknow के संचालन और रखरखाव को UP Cabinet की मंजूरी, 30 साल की लीज पर दिया

Kurukshetra Murder: महिला ने तीन चाकुओं से की पति की हत्या, जांच जारी