दिलीप घोष के पोलिंग एजेंट का मिला शव, सत्ता बदले एक दशक बीत गया लेकिन नहीं बदला बंगाल के राजनीति का रक्त चरित्र

By अभिनय आकाश | May 16, 2024

15 मई की रात से लापता एक भाजपा कार्यकर्ता का शव गुरुवार को पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दवान जिले में मिला। इसके बाद से एक नया विवाद पैदा हो गया और स्थानीय भाजपा नेताओं ने दावा किया कि उसकी हत्या टीएमसी कार्यकर्ताओं ने की है। हालांकि, सत्तारूढ़ टीएमसी ने इस आरोप से इनकार किया है। अभिजीत रॉय मंतेश्वर के जमना क्षेत्र में भाजपा बूथ अध्यक्ष और बूथ संख्या 168 के पोलिंग एजेंट थे। मंतेश्वर बर्दवान-दुर्गापुर लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है जहां दिलीप घोष भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।

राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या 

भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष ने दावा किया कि टीएमसी हमेशा क्षेत्र को आतंकित करने की कोशिश करती है ताकि वह बूथों पर धांधली कर सके। इस बार टीएमसी ऐसा करने में विफल रही और हताशा में उन्होंने शायद अभिजीत की हत्या कर दी। अपनी ओर से टीएमसी प्रवक्ता प्रसेनजीत दास ने कहा कि भाजपा को हर घटना पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। पुलिस जांच कर रही है और सभी दोषियों को सजा दी जायेगी। बंगाल लंबे राजनीतिक हिंसा का लंबे समय से बेहद पुराना इतिहास रहा है। अपने उत्तराधिकार में नक्सली आंदोलन राजनीतिक हिंसा का प्रमुख कारण था। लेकिन नक्सली कार्यकर्ताओं को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया। राजनीतिक हिंसा का सिलसिला 1990 के दशक में शुरू हुआ जब सत्तारूढ़ माकपा कार्यकर्ताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच लगातार झड़पें होती थीं। 1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्जी के एक बयान ने 1977 और 1996 के बीच बंगाल में राजनीतिक हत्याओं की संख्या 28,000 बताई। वामपंथी शासन समाप्त होने से एक साल पहले मुख्यधारा के साप्ताहिक अखबार ने 1977 और 2009 के बीच राजनीतिक हत्याओं की संख्या को 55,000 बताया था। 

नया हिंसा चक्र और निशाने पर बीजेपी कार्यकर्ता

अब ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री के रूप में अपने तीसरे कार्यकाल के साथ बंगाल की राजनीतिक हिंसा में टीएमसी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थकों के बीच झड़पें देखी जा रही हैं। 2019 के लिए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार राजनीतिक हत्याओं में बंगाल राज्यों की सूची में सबसे ऊपर है। अगस्त 2021 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संसद में एक प्रश्न के बताया था कि बंगाल में सबसे अधिक 18 राजनीतिक हत्याएं हुईं। हालांकि, बंगाल में टीएमसी की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी, भाजपा, राजनीतिक हत्याओं की संख्या को बहुत अधिक बताती है। 2019 में भाजपा ने दावा किया कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा में 100 से अधिक कार्यकर्ता मारे गए।

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