By अभिनय आकाश | Jan 17, 2026
भारत ने राफेल फाइटर जेट को लेकर सबसे बड़ा और सबसे अहम कदम उठा लिया है। डिफेंस प्रिक्रोमेंट बोर्ड ने 114 राफेल मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट के प्रपोजल को क्लियर कर दिया है। अगर यह डील फाइनल होती है तो यह भारत के डिफेंस इतिहास की सबसे बड़ी एयरक्राफ्ट डील होगी। लेकिन इस मेगा डील के साथ एक बड़ा विवाद भी चल रहा है। दरअसल डीपीबी क्लीयरेंस मतलब डील साइन नहीं हुई। लेकिन यह सबसे अहम पहला स्टेप होता है। इससे पहले टेक्निकल एवोल्यूशन, ऑपरेशनल जरूरत कॉस्ट एनालिसिस और लॉन्ग टर्म स्ट्रेटेजिक असेसमेंट इन सब पर कई सालों तक काम होता है।
डीपीबी की मंजूरी का मतलब है अगर आगे कोई बड़ी रुकावट नहीं आई तो 114 राफेल जेट्स भारत खरीदेगा। अब यहां सबसे बड़ा सवाल उठता है कि भारत को 114 फाइटर जेट्स की जरूरत क्यों है? दरअसल इंडियन एयरफोर्स की जरूरत है 42 स्क्वाडन। मौजूदा ताकत है 30 से 31 स्क्वाडन की। एक स्क्वाडन में 16 से 18 फाइटर जेट होते हैं। अब समस्या यह है कि MIG-21, MG-2-27 और Jaguar यह सभी अगले कुछ सालों में रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में अगर नई खरीद नहीं हुई तो भारत की एयरफोर्स 28 से 29 क्वार्डन पर गिर सकती है। यह स्थिति भारत के लिए रेड अलर्ट है।
खासकर तब जब पाकिस्तान और चीन दोनों फ्रंट एक्टिव हैं। अब भारत के पास विकल्प थे F15, F16, ग्रिफेन, एसयू, 57 आदि। लेकिन राफेल इसलिए चुना गया क्योंकि यह कॉम्बैट वन एयरक्राफ्ट है। भारत ने पहले भी 36 राफेल खरीदे हैं। इंडियन एयरफोर्स द्वारा पूरी तरह से टेस्टेड और ऑपरेशनल है। राफेल मल्टी रोल कैपेबिलिटी से लैस है। यह डीप स्ट्राइक, न्यूक्लियर डिलीवरी और मैरिटाइम स्ट्राइक में सबसे आगे है। यानी वन एयरक्राफ्ट मल्टीपल रोल्स और सबसे बड़ी बात नया एयरक्राफ्ट लेने में 5 से 7 साल सिर्फ टेस्टिंग में लगते हैं।