भारत सरकार ने लिया निर्णय, अमेरिकी वस्तुओं पर अब चुकाना होगा ऊंचा शुल्क

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 14, 2019

नयी दिल्ली। सरकार ने बादाम, अखरोट और दालों समेत 29 अमेरिकी वस्तुओं पर 16 जून से जवाबी आयात शुल्क लगाने का निर्णय किया है। इससे पहले सरकार इसे लागू करने की समयसीमा को कई बार बढ़ा चुकी है। सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि वित्त मंत्रालय बहुत जल्द इस बारे में अधिसूचना जारी करेगा। सरकार के इस कदम से इन 29 वस्तुओं का निर्यात करने वाले अमेरिकी निर्यातकों को अब ऊंचा शुल्क चुकाना होगा। इससे देश को 21.7 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। पिछले साल 21 जून को सरकार ने इन अमेरिकी वस्तुओं पर ऊंचा शुल्क लगाने का निर्णय किया था। इसकी वजह अमेरिका का भारत से आयात किए जाने वाले कुछ इस्पात और एल्युमीनियम उत्पादों पर शुल्क बढ़ाना था। इस पर जवाबी कार्रवाई करते हुए सरकार ने इन 29 सामानों पर शुल्क बढ़ाने का निर्णय किया था।

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सूत्रों ने बताया कि सरकार ने उच्च शुल्क लागू करने के फैसले से अमेरिका को अवगत करा दिया है। अमेरिका ने पिछले साल मार्च में इस्पात उत्पादों पर शुल्क बढ़ाकर 25 प्रतिशत और एल्युमीनियम उत्पादों पर 10 प्रतिशत कर दिया था। भारत इन उत्पादों का एक बड़ा निर्यातक देश है। शुल्क बढ़ाने से भारतीय इस्पात और एल्युमीनियम उत्पादकों पर 24 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा था। भारत हर साल अमेरिका को 1.5 अरब डॉलर के इस्पात और एल्युमीनियम उत्पाद का निर्यात करता है। हालांकि तब से इसे लागू करने की समयसीमा को कई बार आगे खिसकाया गया क्योंकि सरकार को उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार पैकेज की बातचीत में किसी समाधान को खोज लिया जाएगा।

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लेकिन अमेरिकी सरकार के भारतीय निर्यातकों को तरजीह देने की सामान्य प्रणाली (जीएसपी) में निर्यात छूट खत्म करने के निर्णय के बाद यह बातचीत रुक गयी। अमेरिका ने इन लाभों को पांच जून से खत्म कर दिया है। इससे भारत से अमेरिका को होने वाला 5.5 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित होगा। इन 29 उत्पादों पर उच्च आयात शुल्क लगाने के क्रम में सरकार ने कई उत्पादों पर उच्च शुल्क लगाने की अधिसूचना जारी की है। 

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इसमें अखरोट पर आयात शुल्क 30 से बढ़ाकर 120 प्रतिशत की गया है। इसी तरह काबुली चना, चना और मसूर दाल पर शुल्क 70 प्रतिशत किया गया है जो अभी 30 प्रतिशत है। अन्य दालों पर शुल्क को 40 प्रतिशत किया जाएगा। इसके अलावा बोरिक एसिड और फाउंड्री मोल्ड (लोहे के उत्पाद)के लिए बाइंडर्स पर शुल्क बढ़ाकर साढ़े सात प्रतिशत और घरेलू रिएजेंट्स पर शुल्क बढ़ाकर 10 प्रतिशत किया गया है। आर्टेमिया पर इसे 15 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही कई अन्य उत्पादों मसलन मेवा, लौह एवं इस्पात उत्पाद, सेब, नाशपाती, इस्पाद की चादर, अलॉय इस्पात, ट्यूब एवं पाइप और नट-बोल्ट पर भी शुल्क बढ़ाया गया है। सरकार ने एल्युमीनियम और इस्पात उत्पादों पर अमेरिका के उच्च शुल्क लगाने के मामले में अमेरिका को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के विवाद निपटान विभाग में भी घसीटा है। वित्त वर्ष 2017-18 में भारत का अमेरिका को निर्यात 47.9 अरब डॉलर था जबकि आयात 26.7 अरब डॉलर का हुआ था। इस तरह व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में रहा था।

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