PM Modi US Visit: डिफेंस, बिजनेस, टेक्नोलॉजी और स्ट्रैटेजिक, PM मोदी के अमेरिका दौरे में कौन कौन सी डील होंगी?

By अभिनय आकाश | Jun 20, 2023

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह दिल्ली से अमेरिका के अपने महत्वपूर्ण दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें रक्षा उद्योग में गहन सहयोग और उच्च प्रौद्योगिकी को साझा करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री के रूप में अपने नौ साल के लंबे शासनकाल के दौरान यह पीएम नरेंद्र मोदी की अमेरिका की पहली राजकीय यात्रा होगी। 2014 के बाद से वह बतौर प्रधानमंत्री छह बार अमेरिका जा चुके हैं, लेकिन इस यात्रा को उनकी पिछली तमाम यात्राओं से ज्यादा अहमियत दी जा रही है तो इसके पीछे की बड़ी वजह ये भी है। पीएम मोदी न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में योग दिवस समारोह में शामिल होंगे और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन के साथ बातचीत करेंगे और वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे।

इस संदर्भ में देखें तो इसमें कोई शक नहीं कि भारत और अमेरिका के रिश्ते  नई ऊंचाइयां छूने की ओर हैं। पहले की तरह अब इसमें विश्वास का कोई संकट नहीं रह गया है। जिन समझौतों पर दोनों पक्षों में सहमति बन चुकी है और जिन पर हस्ताक्षर की औपचारिकता इस दौरे में परी होनी है, वे न •केवल दोनों देशों के लिए फायदेमंद है बल्कि द्विपक्षीय रिश्तों के नए चरण की शुरुआत के भी साक्षी बनेंगे। खासकर GE 414 फाइटर जेट इंजन भारत में बनाने का समझौता और अमेरिकी ड्रोन खरीदने का सौदे दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत आधार देंगे और अमेरिका में यह उम्मीद बन रही है कि इससे हथियारों के मामले में भारत की रूस समझौता।

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दोनों देशों के बीच कौन-कौन सी डील होगी?

 सेमीकंडक्टर्स, साइबरस्पेस, एयरोस्पेस, रणनीतिक बुनियादी ढांचे और संचार, वाणिज्यिक अंतरिक्ष परियोजनाओं, क्वांटम कंप्यूटिंग और औद्योगिक और रक्षा क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल समेत तमाम मुद्दों पर चर्चा होगी। पीएम मोदी की यात्रा के दौरान 350 फाइटर जेट इंजनों के भारत में निर्माण का बड़ा राजनीतिक सौदा परवान चढ़ने वाला है। अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रानिक और हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स के बीच समझौते पर हस्ताक्षर 22-23 जून को होने की संभावना है। इस डील के बाद दोनों कंपनियां घरेलू स्तर पर फाइटर जेट इंजन की मैन्युफैक्चरिंग करेंगे। शुरुआत में दोनों कंपनी प्लेन के इंजन बनाएंगे। जबकि भविष्य में भारतीय नौसेना के जहाजों के इंजन भी इसका हिस्सा बन सकते हैं। इस डील को लेकर जो बातचीत हो रही है उसकी सबसे खास बात ये है कि भारत अमेरिका के साथ जेट इंजन बनाने की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने पर जोर दे रहा है। इस डील के बाद भारत स्वदेशी फाइटर इंजन बनाने में सक्षम हो जाएगा। वाशिंगटन शायद ही कभी गैर-सहयोगियों के साथ साझा करता है। 

अमेरिका के लिए भी ये डील क्यों जरूरी

जिस अमेरिका ने 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान भारत को जीपीएस नेविगेशन देने से मना कर दिया था। वो आज अपने हथियारों की टेक्नोलाजी देने को तैयार बैठा है। अमेरिका अब ऐसी स्थिति में आ गया है कि वो कुछ भी करने को तैयार है, लेकिन ये डील साइन कर हो जाए। अमेरिका भारत को चीन का मजबूत प्रतिद्वंदी मानता है। दोनों देश ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ मिलकर क्वाड सुरक्षा समूह का भी हिस्सा हैं, जो चीन को कड़ा संदेश देता है। साथ ही मुक्त और निष्पक्ष हिंद प्रशांत क्षेत्र के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

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