By अंकित सिंह | Oct 26, 2026
1 नवंबर से नोएडा, गुरुग्राम या गाजियाबाद से दिल्ली आने वाले उन वाहन चालकों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिनके पास पुराने पेट्रोल और डीजल वाहन हैं। दरअसल, इस तारीख से दिल्ली में उन वाहनों के प्रवेश पर रोक लग जाएगी, जो दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड हैं और BS-VI उत्सर्जन मानकों (emission standards) को पूरा नहीं करते हैं। दिल्ली के विंटर पॉल्यूशन-कंट्रोल प्लान (सर्दियों में प्रदूषण नियंत्रण योजना) के तहत, यह पाबंदी 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेगी।
सीमा के उस पार, उत्तर प्रदेश में ये आंकड़े और भी अधिक हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मिलाकर चार लाख से ज़्यादा ऐसे वाहन हैं जो BS-VI मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इनमें से आधे से ज़्यादा वाहन BS-IV श्रेणी के हैं, जिनमें मुख्य रूप से पेट्रोल से चलने वाली कारें शामिल हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गाज़ियाबाद में भी ऐसे लगभग चार लाख वाहन हैं। यह नियम खास तौर पर उन लोगों को प्रभावित कर सकता है जो काम या कारोबार के सिलसिले में दिल्ली आते हैं, हालांकि इसमें शामिल सभी वाहनों पर प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को इससे छूट दी गई है; साथ ही एम्बुलेंस, दमकल गाड़ियां और कुछ जरूरी सेवाओं वाले वाहनों को भी छूट प्राप्त है। दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड BS-VI मानक वाले वाहन दिल्ली में आ सकते हैं। इस नियम के तहत दिल्ली में रजिस्टर्ड वाहनों पर कोई पाबंदी नहीं है, हालांकि प्रदूषण और वाहनों की उम्र से जुड़े अन्य नियम पहले की तरह लागू रहेंगे। दिल्ली की सीमाओं पर अधिकारी ऐसे वाहनों की पहचान करने और उन्हें राजधानी में प्रवेश करने से पहले रोकने की तैयारी कर रहे हैं, जो नियमों का पालन नहीं करते हैं। सीमा चौकियों और अहम रास्तों पर लगे AI-आधारित 'ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन' (ANPR) कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे, जिससे नियमों का पालन न करने वाले वाहनों की पहचान करने और उन्हें जांच के लिए रोकने में मदद मिलेगी।