By अंकित सिंह | Sep 30, 2026
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का मतलब सिर्फ़ लड़कियों पर पाबंदियां लगाना नहीं है। उन्होंने लड़कों के व्यवहार और परवरिश पर ज़्यादा ध्यान देने की बात कही और साथ ही राजधानी को सुरक्षित बनाने में पुलिस, नागरिक एजेंसियों और अदालतों की ज़िम्मेदारी पर ज़ोर दिया। मैत्रेयी कॉलेज के डायमंड जुबली समारोह में बोलते हुए, गुप्ता ने कहा कि हाल ही में हुई यौन हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं ने शहर में महिलाओं की सुरक्षा पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
गुप्ता ने कहा कि मेरा मानना है कि हमारे प्रधानमंत्री ही एकमात्र ऐसे नेता हैं जिन्होंने 2014 में लाल किले की प्राचीर से कहा था, आप लड़कियों को तो उपदेश देते रहते हैं, लेकिन लड़कों से कब बात करेंगे? लड़कों को कब समझाएंगे?' यह कहने की भी ज़रूरत नहीं होनी चाहिए कि 'ना' का मतलब 'ना' ही होता है। उनकी यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट द्वारा सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नाबालिगों और महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं का स्वतः संज्ञान लेने के दो दिन बाद आई है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और कहा कि पार्क, बस और सड़कों जैसी सार्वजनिक जगहों को अधिक जोखिम वाले क्षेत्र नहीं बनाया जा सकता।
गुप्ता ने कहा कि पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सुरक्षा में कोई कमी न रहे, और प्रशासन को ऐसी जगहों की पहचान करनी चाहिए जहां लाइट, कैमरे और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को अपनी ज़िम्मेदारियाँ पूरी करनी चाहिए... और यह पक्का करना चाहिए कि ये काम पूरे हों। उन्होंने अदालतों से महिलाओं और लड़कियों से जुड़े मामलों में तेज़ी लाने की भी अपील की। गुप्ता ने कहा कि ऐसे मामलों में तेज़ी लाई जानी चाहिए ताकि जल्द न्याय मिल सके, समाज में एक कड़ा संदेश जाए और दोषियों व गलत काम करने वालों को सज़ा दी जा सके।