By अभिनय आकाश | Oct 23, 2026
दिल्ली की एक अदालत ने सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर आमिर शोकीन को त्रिपुरा के एक युवक के साथ कथित तौर पर नस्लीय दुर्व्यवहार करने के मामले में एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दिल्ली पुलिस ने उससे पूछताछ के लिए छह दिन की हिरासत मांगी थी, जिसके बाद अदालत ने यह आदेश दिया। शुक्रवार को, सदर बाजार पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले के सिलसिले में शोकीन को तीस हजारी अदालत में पेश किया गया। त्रिपुरा पुलिस ने भी इस कथित घटना को लेकर एक FIR दर्ज की है। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के जरिए सामने आई थी। त्रिपुरा के एक युवक के साथ नस्लीय दुर्व्यवहार और अपमान करने के आरोपों के चलते, अदालत में पेश किए जाने से एक दिन पहले दिल्ली पुलिस ने शोकीन को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने छह दिन की हिरासत मांगी थी, क्योंकि वे जांच के सिलसिले में उससे पूछताछ करना चाहते थे। हालांकि, अदालत ने उसे एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
इस मामले को लेकर त्रिपुरा में भी कार्रवाई शुरू हो गई है, जहां पुलिस ने कथित नस्लीय दुर्व्यवहार के संबंध में एक अलग FIR दर्ज की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, त्रिपुरा पुलिस की एक टीम दिल्ली पहुंचने वाली है और शोकीन को अपनी कस्टडी में लेने के लिए सदर बाजार पुलिस स्टेशन से संपर्क करेगी। टीम उसे दिल्ली की एक अदालत में पेश करके 'ट्रांजिट रिमांड' की मांग करेगी, ताकि उसे आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए त्रिपुरा ले जाया जा सके। पुलिस सूत्रों ने यह भी संकेत दिया है कि इस मामले में सात से आठ लोग आरोपी हो सकते हैं। उनकी अलग-अलग भूमिकाओं का अभी पता लगाया जाना बाकी है। जैसे कि क्या वे इस घटना में शामिल थे या उन्होंने वीडियो रिकॉर्ड किया था।
इस कथित घटना की राजनीतिक नेताओं ने कड़ी निंदा की है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। रिजिजू ने कहा कि आरोपी को अपने किए का अंजाम भुगतना होगा। उन्होंने आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी का जिक्र करते हुए दिल्ली और त्रिपुरा पुलिस से तुरंत कार्रवाई करने को कहा। मंत्री ने कहा कि इस बुरे इंसान को सजा जरूर मिलेगी। आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने में देरी हुई, लेकिन दिल्ली पुलिस और त्रिपुरा पुलिस उसे कड़ा सबक सिखाएंगी। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी इस व्यवहार की निंदा की है और जवाबदेही तय करने की मांग की है। लोगों की प्रतिक्रियाओं के बाद, पूर्वोत्तर (नॉर्थईस्ट) के लोगों के खिलाफ होने वाले नस्लीय उत्पीड़न के मामलों पर अब और भी बारीकी से ध्यान दिया जा रहा है।