By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 07, 2026
नयी दिल्ली, सात सितंबर दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को हिंदुत्व समर्थक ‘इन्फ्लुएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह मामला जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा के पिता पर कथित हमले समेत अन्य आरोपों से जुड़ा है। भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया था।
न्यायाधीश ने दिल्ली पुलिस की उस याचिका को मंजूर कर लिया जिसमें आरोपी से एक दिन की पुलिस हिरासत में पूछताछ का अनुरोध किया गया था। रविवार को भारद्वाज को एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललर ने अब भारद्वाज की न्यायिक हिरासत 21 सितंबर तक बढ़ा दी है।
भारद्वाज ने साक्षात्कार में कहा था, ‘‘मैंने सिर फोड़ दिया था...क्या आपको पता है कि इस अपराध में कौन-सी धारा लगती है? धारा 307। उसे 60 टांके लगे थे।’’ जंतर-मंतर पर कॉजपा के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रा के पिता संजय कुमार पर कथित हमले को लेकर दर्ज प्राथमिकी में भारद्वाज के खिलाफ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
दिल्ली पुलिस ने पूर्व में कहा था कि संजय कुमार की चोटें ‘‘साधारण’’ प्रकृति की थीं और ये कड़े से लगी थीं। बाद में भारद्वाज ने एक ‘पॉडकास्ट’ में दावा किया था कि उसने आत्मरक्षा में यह कदम उठाया था। शुक्रवार को एक अलग घटनाक्रम में, पुलिस ने नाबालिग छात्रा की शिकायत पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत एक नयी प्राथमिकी दर्ज की।
शिकायत में ऑनलाइन धमकियों और उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। खबरों के मुताबिक, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(3), धारा 78 (पीछा करना) और धारा 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य) के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 भी प्राथमिकी में जोड़ी है। छात्रा ने इससे पहले आरोप लगाया था कि अपने पिता पर हुए कथित हमले के खिलाफ आवाज उठाने और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद उसे दुष्कर्म की धमकियां दी गईं, अपशब्द कहे गए और छेड़छाड़ कर बनाई गईं तस्वीरें भेजी गईं।
ये घटनाक्रम उस समय सामने आए जब कॉजपा के प्रतिनिधियों ने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद के साथ संसद मार्ग थाने में पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की तथा भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने मामले में हत्या के प्रयास, आपराधिक धमकी और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं जोड़ने तथा नाबालिग कार्यकर्ता को कथित तौर पर दुष्कर्म की धमकियों और ऑनलाइन उत्पीड़न को लेकर अलग से प्राथमिकी दर्ज करने की भी मांग की थी।