By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 15, 2026
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आतंकवाद रोधी कानून के तहत दर्ज एक मामले में आईएसआईएस-समर्थक समूह हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम के एक कथित सदस्य को आठ साल तक उसके जेल में रहने का हवाला देते हुए जमानत दे दी। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ ने कहा कि मुकदमे के ‘‘जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है’’ और उनके समक्ष मौजूद सबूतों के आधार पर मोहम्मद साकिब उर्फ साकिब इफ्तिखार को जमानत देने से इनकार करने का कोई ठोस कारण नहीं बनता। साकिब उत्तर प्रदेश के बक्सर की जामा मस्जिद में इमाम था और हापुड़ का रहने वाला है।
फिलहाल, अभियोजन पक्ष द्वारा उल्लेख किये गए 120 गवाहों में से केवल 40 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। सोमवार को सुनाये गए फैसले में अदालत ने कहा, ‘‘विशेष लोक अभियोजक ने यह बताया है कि प्रतिवादी 39 गवाहों को हटा देगा। भले ही ऐसा हो, लेकिन मुकदमे के जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है।’’ अदालत ने आदेश दिया, ‘‘गवाहों के बयानों और अपीलकर्ता पर लगे आरोपों पर गौर करने के बाद, और खासकर अपीलकर्ता के लंबे समय तक जेल में रहने को ध्यान में रखते हुए, हमारा मानना है अपीलकर्ता जमानत पर रिहा होने का मामला बनाने में सफल रहा है।
इसलिए, हम आदेश देते हैं कि अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाए।’’ अदालत ने जमानत के लिए कई शर्तें तय कीं और साकिब से 50,000 रुपये का निजी मुचलका और उतनी ही रकम के दो जमानतदार पेश करने को कहा। अदालत ने आरोपी से अपना पासपोर्ट जमा करने और मुकदमे की सुनवाई कर रही अदालत की मंज़ूरी के बिना देश से बाहर न जाने का निर्देश दिया।