By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 20, 2026
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत दिल्ली सरकार के उस कदम पर आपत्ति जताई, जिसके तहत महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की वित्तीय सहायता देने वाली लक्ष्मी योजना का लाभ लेने के लिए स्थानीय सांसद या विधायक की संस्तुति अनिवार्य की गई है। मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि पात्रता का निर्धारण आय प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण जैसे दस्तावेजों के आधार पर किया जा सकता है। अदालत ने दिल्ली सरकार के वकील को 24 अगस्त को निर्देशों के साथ पेश होने को कहा।
पीठ ने पाया कि योजना में लाभ लेने के लिए निर्धारित विस्तृत पात्रता मानदंड में विधायक की संस्तुति की आवश्यकता का कोई उल्लेख नहीं है। अदालत ने कहा, ‘‘हमारा प्रथमदृष्टया विचार है कि कोई महिला इन मानदंडों को पूरा करती है या नहीं, इसका आकलन करने के लिए विभिन्न दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। यह संभव है कि किसी महिला को अपने निर्वाचन क्षेत्र के सांसद या विधायक का समर्थन मिले या न मिले।
वैसे भी, इस योजना में किसी संस्तुति पत्र की आवश्यकता का उल्लेख नहीं है।’’ याचिका में कहा गया है कि स्थानीय सांसद या विधायक से अनिवार्य रूप से संस्तुति पत्र प्राप्त करने की शर्त राजनीतिक प्रतिनिधियों को ‘‘मनमाना निर्णय लेने का अधिकार देती है’’ और कल्याणकारी योजना के लाभ को ‘‘राजनीतिक संरक्षण का माध्यम बना देती है।’’ जनहित याचिका के अनुसार, सरकार ने एक अगस्त को ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल शुरू करने के साथ ही इस योजना को लागू किया। पोर्टल पर पंजीकरण के लिए संबंधित सांसद या विधायक का संस्तुति पत्र जमा करना अनिवार्य किया गया है। याचिका में कहा गया है कि ऐसी संस्तुति के लिए सांसदों या विधायकों के लिए न तो कोई निर्धारित समयसीमा है और न ही निर्णय लेने के स्पष्ट मानदंड।
इसके अलावा, संस्तुति पत्र जारी करने से इनकार किए जाने की स्थिति में कोई शिकायत निवारण व्यवस्था भी नहीं है।