By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 27, 2026
दिल्ली पुलिस ने बांग्लादेश से जुड़े एक कथित साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है और लखनऊ तथा कोलकाता में अलग-अलग छापेमारी के बाद दो लोगों को गिरफ्तार किया है जिनके पास से 50 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने कहा कि जब्त किए गए मोबाइल में 45 एकदम नए मोबाइल हैं जिनकी कीमत करीब 25 लाख रुपये है।
बाद में खुद को बैंक का प्रतिनिधि बताने वाले एक व्यक्ति ने ‘मैसेजिंग ऐप’ पर उनसे संपर्क किया और एक फर्जी ‘ऐप’ डाउनलोड करने के लिए कहा। आरोपी ने सत्यापन के बहाने उनकी व्यक्तिगत और क्रेडिट कार्ड की जानकारी कथित तौर पर प्राप्त कर ली और उन्हें कॉल पर उलझाए रखा, जबकि ऑनलाइन ‘इंस्टेंट-डिलीवरी’ और ई-कॉमर्स मंच के माध्यम से उनके क्रेडिट कार्ड से 2.68 लाख रुपये का अनधिकृत लेनदेन किया गया। पुलिस ने कहा कि तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण से पता चला कि ठग कई स्थानों से काम कर रहे थे और उनके बांग्लादेश से संबंध हैं।
पुलिस ने कहा कि जांच में धोखाधड़ी के पैसे से खरीदे गए मोबाइल फोन को लखनऊ, कोलकाता और धनबाद में पहुंचाए जाने का भी पता चला जबकि फर्जी सिम कार्ड पश्चिम बंगाल के 24 परगना से जुड़े थे। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सुराग के आधार पर दो टीमें लखनऊ और कोलकाता भेजी गईं। उनके मुताबिक, लखनऊ टीम ने एक निजी होटल में छापा मारा और कोलकाता निवासी मोहम्मद राशिद नियाज उर्फ दानिश (21) को गिरफ्तार किया और उसके पास से 19 मोबाइल फोन बरामद किए।
पूछताछ के दौरान, राशिद ने कथित तौर पर खुलासा किया कि वह गिरोह के अन्य सदस्यों के निर्देश पर नए मोबाइल फोन लेने के लिए अपने सहयोगी मोहम्मद आसिफ के साथ कोलकाता से आया था। पुलिस ने बताया कि उसने यह भी खुलासा किया कि आसिफ लगभग 30 नए फोन लखनऊ से कोलकाता ले गया था। कोलकाता टीम ने बाद में आसिफ (29) को गिरफ्तार कर लिया और उसके कब्जे से 31 नए मोबाइल फोन बरामद किए।
बरामद किए गए 50 फोन में से 45 बिल्कुल नए और महंगे मोबाइल थे, जिनमें आईफोन भी शामिल थे और उनकी कुल कीमत लगभग 25 लाख रुपये है। आरोपियों द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए पांच फोन भी बरामद किए गए। पुलिस ने कहा कि जब्त किए गए उपकरणों पर मिली आपत्तिजनक बातचीत से आरोपियों और उनके विदेशी सहयोगियों के बीच समन्वय का संकेत मिलता है।
पुलिस ने कहा कि गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने और सीमा पार से सक्रिय पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।