By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 05, 2026
नयी दिल्ली, पांच नवंबर दिल्ली के जंतर-मंतर के आसपास लोगों की आवाजाही पर रोक लगाने के लिए लगाए गए अवरोधक हटा दिए गए हैं। यह कदम गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक समिति की सिफारिशों के बाद जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के कुछ दिनों बाद उठाया गया है। दिल्ली में 18वीं सदी की इस वेधशाला के आसपास रहने वाले लोगों ने लंबे समय से जारी पाबंदियों को लेकर चिंता जताई थी।
इन प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को धरना स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए पूरी लुटियंस दिल्ली लगभग किले में तब्दील हो गई थी। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। कई प्रवेश मार्गों पर अवरोधक लगाए गए थे, आवाजाही पर पाबंदियां लगाई गई थीं और जंतर-मंतर की ओर किसी भी अनधिकृत जमावड़े या मार्च को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए पुलिस ने सामूहिक रूप से एकत्रित होने पर रोक लगाने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 भी लागू की थी। अवरोधकों और पाबंदियों के व्यापक इंतजामों के कारण जंतर-मंतर और उससे सटी सड़कों तक आम लोगों की पहुंच प्रभावी रूप से सीमित हो गई थी। दिल्ली पुलिस आयुक्त द्वारा जारी एक स्थायी आदेश के जरिए 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर को आधिकारिक तौर पर निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया था।
पुलिस ने अधिकृत प्रदर्शनों के लिए तीन वैकल्पिक स्थान तय किए हैं- मध्य दिल्ली में रामलीला मैदान, पूर्वी दिल्ली में सीबीडी मैदान और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में बुराड़ी मैदान। मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि जंतर-मंतर अब विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए उपयुक्त नहीं है और किसी सार्वजनिक सड़क को स्थायी प्रदर्शन स्थल के रूप में निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए। पुलिस ने इसके लिए जन सुरक्षा, यातायात जाम, आपात स्थिति में पहुंच और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष दाखिल जवाबी हलफनामे में दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने कहा कि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का फैसला गृह मंत्रालय द्वारा गठित समिति की सिफारिशों पर विचार करने के बाद लिया गया। समिति ने सर्वसम्मति से इस स्थल को विरोध प्रदर्शनों और धरनों के लिए अनुपयुक्त पाया था। आसपास के इलाकों पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करते हुए हलफनामे में कहा गया कि जंतर-मंतर के लगभग तीन से चार किलोमीटर के दायरे में 78 विदेशी दूतावास, राजनयिक मिशन और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के कार्यालय स्थित हैं।
राष्ट्रीय राजधानी के मध्य भाग में स्थित जंतर-मंतर ऐतिहासिक रूप से राजनीतिक प्रदर्शनों, जन आंदोलनों और नागरिक समाज के विरोध प्रदर्शनों के लिए देश के सबसे प्रमुख स्थलों में से एक रहा है। बीते कई दशकों में इस स्थान पर कई बड़े आंदोलन हुए, जिन्होंने देश का ध्यान आकर्षित किया और राजनीतिक विमर्श पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला। यह स्थल राजनीतिक दलों, कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और अपनी मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने वाले समूहों के लिए पसंदीदा जगह बना रहा।