Swati Maliwal case: दिल्ली पुलिस आज कोर्ट में पेश करेगी 1000 पन्नों की चार्जशीट, बढ़ सकती हैं बिभव कुमार की मुश्किलें

By रितिका कमठान | Jul 16, 2024

आम आदमी पार्टी की सांसद व दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवार के साथ मुख्यमंत्री आवास मे हुई मारपीट के मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निजी सहायक विभव कुमार द्वारा मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस मंगलवार को तीस हजारी कोर्ट में चार्जशीट दायर करेगी। दिल्ली पुलिस इस मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सहयोगी बिभव कुमार के खिलाफ आरोपों की सूची तैयार करेगी।

सूत्रों ने बताया कि पुलिस ने जांच लगभग पूरी कर ली है। पुलिस अब तीस हजारी अदालत में बिभव कुमार के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने के लिए तैयार है। पुलिस ने मामले के संबंध में 1,000 पन्नों का आरोपपत्र भी तैयार किया है, जिसमें घटना के समय केजरीवाल के आवास पर तैनात सुरक्षा कर्मचारियों का भी उल्लेख है। 

पुलिस ने अरविंद केजरीवाल के आवास से डीवीआर जब्त कर लिया है और आरोपी बिभव कुमार के दो मोबाइल फोन सहित कई गैजेट जब्त कर लिए हैं। पुलिस हिरासत के दौरान कुमार को उनके मोबाइल फोन से कथित रूप से डिलीट किये गये डेटा को पुनः प्राप्त करने के लिए दो बार मुम्बई ले जाया गया। स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया कि 13 मई को जब वह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलने उनके आवास पर गयी थीं तो कुमार ने उन पर हमला किया। उन्होंने 16 मई को कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई और 18 मई को दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

राज्यसभा सांसद द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर, दिल्ली पुलिस ने कुमार के खिलाफ सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में धारा 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास), 341 (गलत तरीके से रोकना), 345 बी (महिला के कपड़े उतारने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 506 (आपराधिक धमकी) और 509 (किसी भी शब्द, हाव-भाव या वस्तु का इस्तेमाल कर महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज किया है।

मामले की जांच फिलहाल दिल्ली पुलिस की एक टीम कर रही है, जिसका नेतृत्व एक महिला अतिरिक्त डीसीपी स्तर की अधिकारी कर रही है। इससे पहले, दिल्ली उच्च न्यायालय ने कुमार को जमानत देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि आरोपी का इस मामले में “काफी प्रभाव” है। न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा, "इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा किए जाने की स्थिति में गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है या सबूतों से छेड़छाड़ की जा सकती है।" अदालत ने पुलिस की यह दलील भी दर्ज की कि महत्वपूर्ण साक्ष्य को दबाने का प्रयास किया गया था, क्योंकि जांच के दौरान मुख्यमंत्री आवास पर लगे सीसीटीवी फुटेज के केवल चुनिंदा हिस्से ही सौंपे गए थे। 

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