By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 15, 2026
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) द्वारा एमए इतिहास कार्यक्रम के तीसरे सेमेस्टर से कई ‘विषय विशिष्ट इलेक्टिव (डीएसई) विषयों को हटाने का फैसला आलोचनाओं के घेरे में आ गया है। हाल ही में जारी किए गए नए पाठ्यक्रम में जिन महत्वपूर्ण विषयों को अब शामिल नहीं किया गया है, उनमें द दिल्ली सल्तनत: स्ट्रक्चर्स ऑफ अथॉरिटी इन मिडीवल नॉर्थ इंडिया (13वीं-14वीं शताब्दी) नामक विषय भी शामिल है। यह विषय विशेष रूप से दिल्ली सल्तनत के राजनीतिक एवं प्रशासनिक ढांचे और मध्यकाल के दौरान सामाजिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक जीवन में आए बदलावों से संबंधित था।
इन विषयों को पाठ्यक्रम से हटाए जाने को लेकर इतिहासकार और डीयू अकादमिक परिषद की सदस्य माया जॉन ने आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कई विषयों को हटाना विभाग की पाठ्यक्रम समिति (कमेटी ऑफ कोर्सेज) की स्वायत्तता का उल्लंघन है, इसमें पाठ्यक्रम तैयार करने में विशेषज्ञता रखने वाले शिक्षाविद शामिल हैं। जॉन ने ‘विशेषज्ञ’ या ‘निगरानी समिति’ के गठन के तरीके पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि ऐसी समिति का गठन विश्वविद्यालय की वैधानिक प्रणालियों के तहत किया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर इसमें अकादमिक परिषद को भी शामिल किया जाना चाहिए।