Delhi ने आधी रात को पत्थरबाजों को दिया संदेश- कानून का पहिया रुकेगा नहीं और पत्थरबाजी से अवैध कब्जा बचेगा नहीं

By नीरज कुमार दुबे | Jan 07, 2026

अतिक्रमणकारियों को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से एक कड़ा और बड़ा संदेश गया है। हम आपको बता दें कि दिल्ली नगर निगम के 32 बुलडोजर धड़धड़ाते हुए अतिक्रमण वाले इलाके में पहुँचे और अवैध निर्माण को  मिट्टी में मिला दिया। इस दौरान अतिक्रमणकारियों ने पथराव किया जिसके चलते पुलिस को सख्ती करनी पड़ी। हम आपको बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर दिल्ली नगर निगम का दस्ता अतिक्रमण हटाने के लिए पहुँचा था लेकिन अतिक्रमणकारियों ने पथराव कर दिया जिसमें पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति यह हो गयी कि हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। हालांकि बाद में स्थिति सामान्य कर दी गयी। बताया जा रहा है कि पुलिस ने अब तक 10 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है।

इसे भी पढ़ें: Delhi के Turkman Gate में Police पर पथराव, मंत्री Ashish Sood बोले- दोषी बख्शे नहीं जाएंगे

हम आपको यह भी बता दें कि एमसीडी के उपायुक्त विवेक कुमार ने कहा है कि यह विध्वंस अभियान उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में संचालित किया गया था, जिसके दौरान लगभग 36,000 वर्ग फुट अतिक्रमित क्षेत्र को खाली कराया गया। एमसीडी उपायुक्त विवेक कुमार ने बताया कि खाली कराए गए क्षेत्र में एक निदान केंद्र, एक विवाह हॉल और दो दोमंजिला चारदीवारी शामिल थीं। उन्होंने बताया कि ढहाने का काम पूरी रात जारी रहा। उन्होंने बताया कि घटनास्थल पर अब भी इतना मलबा पड़ा है जिससे लगभग 200 से 250 वाहन भरे जा सकते हैं और इसे सफाई अभियान के तहत हटाया जाएगा। विवेक कुमार ने स्पष्ट किया कि इस अभियान के दौरान मस्जिद को कोई क्षति नहीं पहुंची। उन्होंने कहा कि संरचनाओं को गिराने में समय लगा क्योंकि वे बेहद मजबूत थीं और उनकी दीवारें लगभग नौ इंच मोटी थीं।

देखा जाये तो इस कार्रवाई से साफ है कि जो लोग अदालत के आदेश को चुनौती देने के लिए पत्थर उठाते हैं वे लोकतंत्र नहीं अराजकता की भाषा बोलते हैं। नगर निगम की यह कार्रवाई किसी समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि अवैध कब्जे के खिलाफ थी। जमीन सरकारी थी, आदेश न्यायालय का था और जिम्मेदारी प्रशासन की थी। इसके बावजूद कुछ लोग भीड़ जुटाकर हिंसा पर उतर आए। यह सीधे सीधे कानून के शासन पर हमला है।

सवाल साफ है। क्या सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसे आस्था की आड़ में बचाया जा सकता है। दिल्ली नगर निगम ने वही किया जो उसे करना चाहिए था। उसने किसी धार्मिक संरचना को हाथ नहीं लगाया बल्कि अवैध निर्माण हटाए। इसके बाद भी पुलिस पर पत्थर बरसाए गए। यह विरोध नहीं अपराध है। जो लोग घायल पुलिसकर्मियों पर चुप हैं वे बताएं कि ड्यूटी पर तैनात जवान की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन है। कानून व्यवस्था संभालने वाले हाथों पर पत्थर चलाना किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे तत्व समाज के दुश्मन हैं और इनके साथ सख्ती ही एकमात्र इलाज है। देखा जाये तो दिल्ली नगर निगम और पुलिस ने संयम दिखाया। न्यूनतम बल प्रयोग किया। हालात संभाले और संदेश साफ दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं। अब वक्त है कि अतिक्रमणकारियों और पत्थरबाजों को यह समझा दिया जाए कि सरकारी जमीन कोई विरासत नहीं और अदालत का आदेश मजाक नहीं। अगर व्यवस्था को चुनौती दी जाएगी तो जवाब भी उसी दृढ़ता से मिलेगा। यह कार्रवाई सही थी, जरूरी थी और आगे भी जारी रहनी चाहिए। कानून का पहिया रुकेगा नहीं और पत्थरबाजी से अवैध कब्जा बचेगा नहीं।

प्रमुख खबरें

कूटनीति के जरिए पेट्रोलियम आपूर्ति को रखा बरकरार

Kashmir में शिक्षा के नाम पर चल रही थी बड़ी साजिश! खुफिया रिपोर्ट के बाद तीन विश्वविद्यालयों ने लिया बड़ा एक्शन

BPSC AEDO Exam Alert: 10 लाख अभ्यर्थी सावधान! ये एक गलती आपको Merit List से बाहर कर देगी

Asha Bhosle Last Wish Video | होंठों पर गीत लिए विदा होना चाहती थी, आशा ताई का पुराना वीडियो वायरल, निधन से टूटा प्रशंसकों का दिल