Book Review: छत्रपति शिवाजी महाराज के किलों और उनसे जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों का रोचक वर्णन 'हिन्दवी स्वराज्य दर्शन'

By प्रो. संजय द्विवेदी | Jan 02, 2024

लेखक लोकेन्द्र सिंह बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। कवि, कहानीकार, स्तम्भलेखक होने के साथ ही यात्रा लेखन में भी उनका दखल है। घुमक्कड़ी उनका स्वभाव है। वे जहाँ भी जाते हैं, उस स्थान के अपने अनुभवों के साथ ही उसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व से सबको परिचित कराने का प्रयत्न भी वे अपने यात्रा संस्मरणों से करते हैं। अभी हाल ही उनकी एक पुस्तक ‘हिन्दवी स्वराज्य दर्शन’ मंजुल प्रकाशन से प्रकाशित हुई है, जो छत्रपति शिवाजी महाराज के किलों के भ्रमण पर आधारित है। हालांकि, यह एक यात्रा वृत्तांत है लेकिन मेरी दृष्टि में इसे केवल यात्रा वृत्तांत तक सीमित करना उचित नहीं होगा। यह पुस्तक शिवाजी महाराज के किलों की यात्रा से तो परिचित कराती ही है, उससे कहीं अधिक यह उनके द्वारा स्थापित ‘हिन्दवी स्वराज्य’ या ‘हिन्दू साम्राज्य’ के दर्शन से भी परिचित कराती है। हम सब जानते हैं कि जिस वक्त शिवाजी महाराज ने स्वराज्य का स्वप्न देखा था, उस समय भारत के अधिकांश भाग पर मुगलिया सल्तनत की छाया थी। उस दौर में पराक्रमी राजाओं ने भी स्वतंत्र हिन्दू राज्य की कल्पना करना छोड़ दिया था। तब एक वीर किशोर ने अपने आठ-नौ साथियों के साथ महादेव को साक्षी मानकर ‘हिन्दवी स्वराज्य’ की प्रतिज्ञा ली। अपनी इस प्रतिज्ञा को पूरा करने में हिन्दवी स्वराज्य के मावलों का जिस प्रकार का संघर्ष, समर्पण और बलिदान रहा, उसे आज की पीढ़ी को बताना बहुत आवश्यक है। लोकेन्द्र सिंह की पुस्तक इस उद्देश्य में भी बहुत हद तक सफल होती है। 

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हम कह सकते हैं कि ‘हिंदवी स्वराज्य दर्शन’ अपने पाठकों को छत्रपति शिवाजी महाराज के दुर्गों के दर्शन कराने के साथ ही स्वराज्य की अवधारणा एवं उसके लिए हुए संघर्ष–बलिदान से परिचित कराती है। पुस्तक में सिंहगढ़ दुर्ग पर नरवीर तानाजी मालूसरे के बलिदान की कहानी, पुरंदर किले में मिर्जाराजा जयसिंह के साथ हुए ऐतिहासिक युद्ध एवं संधि, पुणे के लाल महल में औरंगजेब के मामा शाइस्ता खान पर शिवाजी महाराज की सर्जिकल स्ट्राइक का रोचक वर्णन लेखक लोकेन्द्र सिंह ने किया है। इसके साथ ही शिवाजी महाराज की राजधानी दुर्ग दुर्गेश्वर रायगढ़ का सौंदर्यपूर्ण वर्णन लेखक ने किया है। पुस्तक का यह सबसे अधिक विस्तारित अध्याय है। छत्रपति के राज्याभिषेक का तो आँखों देखा हाल सुनाने का लेखकीय कर्म का बखूबी निर्वहन किया गया है। पाठक जब राज्याभिषेक के वर्णन को पढ़ते हैं, तो स्वाभाविक ही वे स्वयं को छत्रपति के राज्याभिषेक समारोह में खड़ा हुआ पाते हैं। राज्याभिषेक का एक-एक दृश्य पाठक की आँखों में उतर आता है। 

यह संयोग ही है कि यह वर्ष हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना 350वां वर्ष है। इस निमित्त देशभर में हिन्दवी स्वराज्य की संकल्पना एवं उसकी प्रासंगिकता को जानने-समझने के प्रयत्न हो रहे हैं। ऐसे में लोकेंद्र सिंह की बहुचर्चित पुस्तक ‘हिंदवी स्वराज्य दर्शन’ को पढ़ना सुखद है। लेखक श्रीशिव छत्रपति दुर्ग दर्शन यात्रा के बहाने इतिहास के गौरवशाली पृष्ठ हमारे सामने खोलकर रख दिए हैं। लेखनी का प्रवाह मैदानी नदी की तरह सहज-सरल है। जो पहले पृष्ठ से आखिरी पृष्ठ तक पाठक को अपने साथ सहज ही लेकर चलती है। यदि आपकी यात्राओं में रुचि है और इतिहास एवं संस्कृति को जानने की ललक है, तब यह पुस्तक अवश्य पढ़िए। ‘हिंदवी स्वराज्य दर्शन’ अमेजन पर उपलब्ध है। अमेजन पर यह पुस्तक यात्रा लेखन श्रेणी के अंतर्गत काफी पसंद की जा रही है। पुस्तक का प्रकाशन ‘मंजुल प्रकाशन’ ने किया है।

पुस्तक : हिन्दवी स्वराज्य दर्शन

लेखक : लोकेन्द्र सिंह

मूल्य : 250 रुपये (पेपरबैक)

प्रकाशक : सर्वत्र, मंजुल पब्लिशिंग हाउस, भोपाल   

- प्रो. (डॉ) संजय द्विवेदी

(समीक्षक, भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक हैं।)

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