By अभिनय आकाश | Aug 12, 2026
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार अलग-अलग समुदायों की आरक्षण की मांगों पर विचार करेगी, लेकिन फ़ैसले सिर्फ़ संविधान और नियमों के दायरे में ही लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार जनहित और संविधान के अनुरूप मांगों पर विचार करेगी और जो मांगें इनके मुताबिक नहीं होंगी, उन्हें खारिज कर देगी। उनके ये बयान आरक्षण की मांगों, खासकर मराठा समुदाय और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी से जुड़ी मांगों को लेकर चल रही नई राजनीतिक बहस के बीच आए हैं। फडणवीस ने कहा कि सरकार मराठा, OBC, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विमुक्त जाति और खानाबदोश जनजातियों समेत सभी समुदायों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और वह एक समूह का हक छीनकर दूसरे को नहीं देगी।
बावनकुले का बचाव करते हुए फडणवीस ने कहा कि संवैधानिक रूप से किसी मंत्री के लिए ज़रूरी है कि वह शिकायतों और आवेदनों को जांच के लिए संबंधित विभाग को भेजे। उन्होंने कहा कि जब भी किसी मंत्री के पास कोई शिकायत आती है, तो संविधान के तहत मंत्री की यह ज़िम्मेदारी होती है कि वह उसे जांच के लिए आगे भेजे। इसी के अनुसार, मिलने वाले हर आवेदन को संबंधित विभाग को भेजा जाता है। विभाग सिर्फ़ ऐसे आवेदन के आधार पर फ़ैसला नहीं लेता; वह सबूतों के आधार पर फ़ैसला करता है। फडणवीस ने यह भी कहा कि इस मामले को देखने वाली कमिटी सरकार से स्वतंत्र है और उसके पास न्यायिक शक्तियां हैं। उन्होंने कहा कि कमिटी सरकार के अधीन नहीं है और न ही वह सरकार को रिपोर्ट करती है। उसके पास न्यायिक शक्तियां हैं। अगर कोई उसके फैसले से असंतुष्ट है, तो हाल ही में खत्म हुए सत्र में एक अपीलीय अथॉरिटी बनाई गई है, और वे उसके पास जा सकते हैं।