By अंकित सिंह | Oct 17, 2026
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 17 अक्टूबर को विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से हटकर केंद्र सरकार को "गिराने" की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) का विरोध करना असल में सत्ता परिवर्तन की एक चाल है। 'X' पर एक पोस्ट में फडणवीस ने लिखा कि चूंकि लोकतांत्रिक तरीके से पात्र मतदाताओं के वोट पाकर उनके जीतने की कोई दूर-दूर तक संभावना नहीं है, इसलिए आखिरकार 'सच' सामने आ ही गया। देश में अराजकता फैलाकर सत्ता हथियाने की उनकी साजिश का पर्दाफाश हो गया है!
फडणवीस ने आरोप लगाया कि SIR के खिलाफ विपक्ष का अभियान असल में लोकतंत्र के खिलाफ एक अभियान है। उन्होंने कहा कि असली विरोध आपके और मेरे वोट के खिलाफ है—यानी उन नागरिकों के वोट के खिलाफ, जिन्हें वोट देने का अधिकार है।” उन्होंने जनता से अपील की कि वे लोकतंत्र का समर्थन करने वालों और ‘सत्ता परिवर्तन’ की वकालत करने वालों में से किसी एक को चुनें। उन्होंने कहा, “अब हमें तय करना होगा: क्या हमें लोकतंत्र चाहिए, या फिर वे लोग चाहिए जो ‘सत्ता परिवर्तन’ की बात करते हैं? लोकतंत्र को बचाने के लिए ‘SIR’ का कोई विकल्प नहीं है!
ये टिप्पणियां उस विवाद के बाद आईं, जब वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे आंदोलन को सत्ता परिवर्तन की लड़ाई (फाइट फॉर रेजीम चेंज) बताया, जबकि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश के 'जेन जेड' (Gen Z) आंदोलन का जिक्र किया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन बयानों को चुनावी तरीकों से इतर मोदी सरकार को गिराने की कोशिशों का सबूत माना, लेकिन विपक्ष ने इस आरोप को खारिज कर दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने सत्ता परिवर्तन (रेजीम चेंज) शब्द के इस्तेमाल का बचाव करते हुए इसे लोकतंत्र में सामान्य बताया।