'हीमैन' से अलग, धर्मेंद्र का 'सत्यकाम', 'बंदिनी' और 'अनुपमा' का संवेदनात्मक चेहरा, जिन्हें भूलना नामुमकिन

By Renu Tiwari | Nov 24, 2025

धर्मेंद्र को ‘हीमैन’ की छवि में बांधना शायद उन अभिनेता के साथ अन्याय होगा जो कभी ‘सत्यकाम’ के सिद्धांतवादी सत्यप्रिय था तो कभी अपनी कैदी से मूक प्रेम कर बैठा ‘बंदिनी’ का डॉक्टर अशोक तो कभी ‘अनुपमा’ को साहस देने वाला प्रेमी। वहीं उनके यादगार किरदारों में ‘चुपके चुपके’ के प्रोफेसर परिमल त्रिपाठी या प्यारेमोहन इलाहाबादी को कौन भूल सकता है। धर्मेंद्र का जिक्र सिर्फ शराब पीकर पानी की टंकी पर चढकर बसंती की मौसी से नाराजगी जताने वाले वीरू या ‘ कुत्ते मैं तेरा खून पी जाऊंगा’ कहते नायक के रूप में करना अभिनय में संवेदनशीलता की असाधारण मिसाल देने वाले उनके कई अमर किरदारों के साथ ज्यादती होगी।

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इसके बाद 1966 में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली ऋषिकेश मुखर्जी की ‘अनुपमा’ में उन्होंने अपनी स्पष्टवादिता के कारण बेरोजगार रहने वाले लेखक और शिक्षक अशोक की भूमिका निभाई जो नायिका अनुपमा (शर्मिला टैगोर) में आत्मविश्वास भरता है। संवाद कम थे लेकिन अभिव्यक्ति की ताकत और व्यक्तित्व की गरिमा ने उस किरदार को इतना लोकप्रिय बनाया कि आज तक सिनेप्रेमियों के जेहन में चस्पा है।

भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ कॉमेडी टाइमिंग की बात होगी तो उसमे 1975 में आई ऋषिकेश मुखर्जी की ‘चुपके चुपके’ में धर्मेंद्र के किरदार को हमेशा याद किया जायेगा। अपनी पत्नी के हिन्दीप्रेमी जीजा को उन्हीं की जबां में सबक सिखाने के लिये बॉटनी के प्रोफेसर परिमल त्रिपाठी से ड्राइवर प्यारेमोहन बने धर्मेंद्र की सादगी, मासूमियत और संवाद अदायगी ने इस फिल्म को हर पीढी की पसंदीदा बना दिया।

के इर्द गिर्द बनी इस फ़िल्म में शुद्ध हिंदी बोलने का नाटक करने वाले धर्मेंद्र के संवाद सिनेप्रेमियों को आज तक याद हैं। वह ख़ुद को ड्राइवर नहीं वाहन चालक बताते हैं, हाथ धोने को हस्त प्रक्षालन , ट्रेन को लौह पथ गामिनी बोलते हैं और यहां तक कहते हैं कि भोजन तो हमने लौह पथ गामिनी स्थल पर ही कर लिया था।

पंजाब के साहनेवाल से मायानगरी मुंबई पहुंचे धर्मेंद्र को आज की पीढी भले ही ‘ही मैन’ के रूप में जानती हो लेकिन अभिनय की बुलंदियों को तो उन्होंने कैरियर के शुरूआती दौर में अपने शालीन, गरिमामय और दमदार अभिव्यक्ति से भरपूर इन किरदारों के दम पर छू लिया था। हिन्दी सिनेमा के इतिहास की कालजयी रचनाओं के ये किरदार भी स्वर्णिम विरासत का हिस्सा रहेंगे।

News- PTI 

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