By अनन्या मिश्रा | Oct 07, 2026
खानपान और लाइफस्टाइल से जुड़ी गड़बड़ी ने कई तरह की क्रॉनिक बीमारियों के खतरे को काफी बढ़ा दिया है। लिहाजा कई बीमारियां जो पहले के समय नें बढ़ती उम्र के साथ हुआ करती थी, वह कम उम्र वालों में भी देखी जा रही है। इनमें से एक दिक्कत आखों की है। अब कम उम्र में आंखों की रोशनी कम होने और चश्मा लगने की समस्या बेहद आम बात हो गई हैं। आंखों की रोशनी कम होने के पीछे कई वजह हो सकती हैं।
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लंबे समय तक ब्लड शुगर हाई रहने की वजह से आंख की रेटिना की ब्लड वेसेल्स को नुकसान हो सकता है। इसको डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है।
हालांकि शुरूआत में इसका कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता है। हालांकि समय के साथ आपकी रोशनी धुंधली दिखने लगे, आंखों के सामने धब्बे या रोशनी कम होने जैसी समस्या हो सकती है।
डायबिटीज वाले लोगों में ग्लूकोमा और मोतियाबिंद का खतरा बढ़ा हुआ देखा जाता रहा है।
डायबिटीज के शिकार लोगों को आंखों से जुड़ी समस्या को कम करने के लिए ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने के साथ-साथ साल में कम से कम 1 बार आंखों की जांच जरूर कराना चाहिए।
लगातार ब्लड प्रेशर बढ़े रहने से शरीर की रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है। आंखों में मौजूद छोटी रक्त वाहिकाएं भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए हाई बीपी वाले लोगों को नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखना चाहिए।
अगर आपकी आंखों की रोशनी अचानक से धुंधली हो जाती है, आंखों के सामने अचानक धब्बे दिखाई दें या नजर में अचानक बदलाव महसूस होने लगे, तो इसको सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
आंखों की समस्या होने के अलावा ब्लड प्रेशर हाई रहने पर फौरन डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
ग्लूकोमा बीमारी आंख की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाती है। अगर इसका समय पर इलाज नहीं हो, तो इससे धीरे-धीरे नजर कमजोर हो सकती है। वहीं मोतियाबिंद की समस्या होने पर आंखों का प्राकृतिक लेंस धुंधला होने लगता है। जिस कारण देखने में परेशानी होती है।
उम्र बढ़ने के साथ मोतियाबिंद का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज वाले लोगों में इन दोनों तरह की समस्याओं का जोखिम ज्यादा रहता है। आंखों में लगातार रोशनी के आसपास घेरा, लगातार धुंधलापन या नजर में बदलाव जैसे लक्षण होने पर जांच करना चाहिए।
आंखों की कुछ गंभीर बीमारियां ऐसी भी हो सकती हैं, जो बिना किसी शुरूआती लक्षण के बढ़ती हैं। डायबिटिक रेटिनोपैथी इसका उदाहरण है। इसलिए सिर्फ नजर कम होने पर ही आंखों की जांच नहीं करानी चाहिए, बल्कि डायबिटीज से पीड़ित लोगों को भी नियमित रूप से आई चेकअप कराते रहना चाहिए।
ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना, धूम्रपान से दूरी बनाना और डॉक्टर की बताई गई जांच कराना आंखों की रोशनी को बचाए रखने में सहायता कर सकता है।