By अभिनय आकाश | Aug 21, 2026
बिहार में महंगाई की मार अब रसोई के मीठे स्वाद पर भी भारी पड़ने लगी है। एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की महंगाई से जूझ रही जनता के लिए चीनी के बढ़े दामों ने घरेलू बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। महज दो हफ्तों के भीतर चीनी की कीमतें करीब 48-50 रुपये प्रति किलो से उछलकर 65 रुपये के पार पहुंच गई हैं। बढ़ते दामों और जमाखोरी को रोकने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। तय सीमा से अधिक चीनी का स्टॉक रखने वाले कारोबारियों पर मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चीनी मिल मालिकों के लिए भी नियम कड़े कर दिए गए हैं। वे अपने गोदामों में एक हफ्ते से अधिक समय तक चीनी का स्टॉक जमा नहीं रख सकेंगे। गन्ना मंत्री संजय कुमार ने राज्य भर में चीनी के स्टॉक की सघन जांच करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री के डेटा के अनुसार, 18 अगस्त को खुदरा चीनी की कीमतें सालाना आधार पर लगभग 13 प्रतिशत बढ़कर 52.30 रुपये प्रति किलो हो गईं, जो एक साल पहले 46.34 रुपये थीं। आमतौर पर अगस्त और नवंबर के बीच चीनी की मांग बढ़ जाती है, क्योंकि इस दौरान देश में गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार मनाए जाते हैं। नए आदेश के तहत, हर मिल से थोक खरीदार को बेची जाने वाली चीनी की मासिक मात्रा (चाहे सीधे बेची जाए या डीलरों के ज़रिए) की जांच की जाएगी। चीनी के लिए लागू HSN कोड का इस्तेमाल करते हुए, विक्रेताओं और/या खरीदारों द्वारा फाइल किए गए GST रिटर्न के आधार पर खपत तय की जाएगी। थोक खरीदार का मतलब है - कन्फेक्शनर (मिठाई/बेकरी उत्पाद बनाने वाला), सॉफ्ट ड्रिंक बनाने वाली कंपनी, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, मिठाई विक्रेता या कोई अन्य संस्थागत खरीदार, जिसकी पिछले एक साल (मौजूदा महीने को छोड़कर) में औसत मासिक खपत 10 टन से कम न रही हो। यह आदेश केंद्र या राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन या स्थानीय निकायों से जुड़ी संस्थाओं पर लागू नहीं होता है। स्टॉक रखने के कड़े नियम 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 सीज़न के लिए चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंताओं के बीच लाए गए हैं।