दीदी को HC से लगा झटका तो बोलीं स्मृति ईरानी- ममता को देना होगा अपने किए का हिसाब, जानें क्या है पूरा मामला

By अभिनय आकाश | Jun 21, 2021

पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग क जांच पर कोलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करने वाली ममता सरकार को करारा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने जांच पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से अदालत के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कि ममता को अपने किए का हिसाब देना होगा। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि मैं न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त करती हूं। प्रताड़ित, घरों से निकाले, मौत के घाट उतारे लोगों के लिए विश्वास जगा है कि उन्हें न्याय मिलेगा। एक मुख्यमंत्री (ममता बनर्जी) राज्य में सजाए मौत होते देख रही हैं क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री के पक्ष में वोट नहीं किया।

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बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने भी ममता सरकार पर निशाना साधते हुए झूठ बोलने का आरोप लगाया। बीजेपी प्रभारी विजयवर्गीय ने कहा कि हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि बंगाल सरकार असत्य बोल रही है, बंगाल में हिंसा हो रही है, उसके बाद भी मुख्यमंत्री  कह रही हैं कि हिंसा नहीं हुई। हाई कोर्ट ने मानव अधिकार आयोग को कहा है कि एक टीम बनाएं और जहां हिंसा हुई है उसकी रिपोर्ट सीधे हाई कोर्ट को दें। 

दीदी को उच्च न्यायालय से लगा झटका 

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में विधान सभा चुनाव बाद हिंसा की घटनाओं में मानव अधिकारों के उल्लंघन की जांच राष्ट्रीय मानव अधिकारआयोग को सौंपने संबंधी आदेश सोमवार को वापस लेने से इंकार करते हुये इस बारे में राज्य सरकार का आवेदन खारिज कर दिया।अदालत ने मानव अधिकारआयोग को एक समिति गठित कर राज्य में चुनाव बाद हिंसा के दौरान कथित मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं की जांच करने का आदेश दिया था। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने जनहित याचिकाओं के एक समूह पर पारित आदेश को वापस लेने का पश्चिम बंगाल सरकार का आवेदन खारिज कर दिया। इन जनहित याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि राजनीतिक हमलों की वजह से लोगों को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा, उनके साथ मारपीट की गई, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और कार्यालयों में लूटपाट की गई। पीठ ने 18 जून को पश्चिम बंगाल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव (डब्ल्यूएमएलएसए) की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए यह आदेश सुनाया था।  

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