By अभिनय आकाश | Jul 28, 2026
सऊदी अरब में स्थित सरकारी तेल कंपनी अरामको के अबक ऑयल प्रोसेसिंग प्लांट और पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशन पर ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई है। सेटेलाइट आधारित सर्विलांस सिस्टम नासा फर्म्स की सेटेलाइट तस्वीरों में संयंत्र के आसपास बड़े पैमाने पर आग लगी दिखी जिससे ऑयल सेंटर को नुकसान पहुंचने की बड़ी आशंका जताई जा रही है। हालांकि सऊदी अधिकारियों ने नुकसान का आकलन अभी सार्वजनिक नहीं किया है। लेकिन घटना ने दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा केंद्रों में से एक की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल स्टेबलाइजेशन प्लांट माना जाता है। यहां सऊदी अरब के बड़े हिस्से का कच्चा तेल निर्यात से पहले प्रोसेस्ड किया जाता है। अनुमान है कि यह संयंत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लगभग 5 से 7% हिस्से की प्रोसेसिंग से जुड़ा है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है।
हूती विद्रोहियों ने इससे पहले अरामको के अन्य फैसिलिटीज पर भी हमला किया था जिससे अरामको की फैसिलिटीज में आग लग गई थी। सऊदी की तेल रिफाइनरिया, होती विद्रोहियों या फिर ईरान समर्थित अन्य मलेशिया समूहों के निशाने पर बहुत आसानी से आ जाते हैं। सऊदी के एयर डिफेंस सिस्टम कई बार इन्हें रोक लेते हैं। लेकिन जब नहीं रोक पाते तो यह भीषण तबाही मचाते हैं। एक हमला सऊदी की तेल रिफाइनरी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि हमला ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है और क्षेत्र की ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। अब एक संयंत्र पर अतीत पर हुए हमलों का भी वैश्विक तेल कीमतों पर असर पड़ा था। इसलिए यह घटना अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा क्षेत्र की नजर में आ गई है। फिलहाल सऊदी अधिकारी स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए और नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं। जबकि निवेशक संभावित आपूर्ति रुकावट और तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर सतर्क हैं।